Heart Broken Poetry (page 227)
वो तवानाई कहाँ जो कल तलक आज़ा में थी
अतीक़ुल्लाह
वो मेरे नाले का शोर ही था शब-ए-सियह की निहायतों में
अतीक़ुल्लाह
वो जो सर्फ़-ए-निगाह करता है
अतीक़ुल्लाह
मुझ से बे-ज़ारो न यूँ संग से मारो मुझ को
अतीक़ुल्लाह
मिरे सुपुर्द कहाँ वो ख़ज़ाना करता था
अतीक़ुल्लाह
क्या तुम ने कभी ज़िंदगी करते हुए देखा
अतीक़ुल्लाह
कीसा-ए-दरवेश में जो भी है ज़र उतना ही है
अतीक़ुल्लाह
ख़्वाबों की किर्चियाँ मिरी मुट्ठी में भर न जाए
अतीक़ुल्लाह
कौन गुज़रा था मेहराब-ए-जाँ से अभी ख़ामुशी शोर भरता हुआ
अतीक़ुल्लाह
जब भी तन्हाई के एहसास से घबराता हूँ
अतीक़ुल्लाह
इस दश्त नवर्दी में जीना बहुत आसाँ था
अतीक़ुल्लाह
गरचे मैं सर से पैर तलक नोक-ए-संग था
अतीक़ुल्लाह
दे कर पिछली यादों का अम्बार मुझे
अतीक़ुल्लाह
चराग़ हाथों के बुझ रहे हैं सितारा हर रह-गुज़र में रख दे
अतीक़ुल्लाह
बहुत दिन से तुम्हें देखा नहीं था
अतीक़ुल्लाह
अंधेरा मेरे बातिन में पड़ा था
अतीक़ुल्लाह
आसमाँ का सितारा न महताब है
अतीक़ुल्लाह
वो बात जिस से ये डर था खुली तो जाँ लेगी
आतिफ़ ख़ान
मैं इंसान-ए-नौअ' हूँ मैं ईसा-नफ़स हूँ
आतिफ़ ख़ान
एक वो ही शख़्स मुझ को अब गवारा भी नहीं
आतिफ़ ख़ान
दुनिया से हुए बैठे हो रू-पोश ऐ जाना
आतिफ़ ख़ान
मोहब्बतें भी लिखी हुई हैं अदावतें भी लिखी हुई हैं
अतहर सलीमी
धुएँ में डूबे हैं फूल तारे चराग़ जुगनू चिनार कैसे
अतहर सलीमी
यूँ तसव्वुर में दबे पाँव तिरी याद आई
अतहर राज़
गिरती हुई दीवार का साया था तिरा साथ
अतहर राज़
मुसव्विर का हाथ
अतहर राज़
फूलों से बहारों में जुदा थे तो हमीं थे
अतहर राज़
ग़म के बादल दिल-ए-नाशाद पे ऐसे छाए
अतहर राज़
यक़ीन बरसों का इम्कान कुछ दिनों का हूँ
अतहर नासिक
यही जो तेरे मिरे दिल की राजधानी थी
अतहर नासिक