Heart Broken Poetry (page 225)

ये इक शान-ए-ख़ुदा है मैं नहीं हूँ

आज़ाद अंसारी

सितम-दोस्त फ़िक्र-ए-अदावत कहाँ तक

आज़ाद अंसारी

न पूछो कौन हैं क्यूँ राह में नाचार बैठे हैं

आज़ाद अंसारी

हक़ बना बातिल बना नाक़िस बना कामिल बना

आज़ाद अंसारी

इबारतें चमक रही हैं दिल में तेरे प्यार की

आयुष चराग़

दिल ने खुलने की राह ले ली है

आयुष चराग़

डराने वाला सुन कर डर रहा है

आयुष चराग़

दिल में कुछ दर्द सिवा है यारो

अय्यूब रूमानी

मोहब्बत का एक साल

अय्यूब ख़ावर

कुछ और हो भी तो राएगाँ है

अय्यूब ख़ावर

ज़ब्त करना न कभी ज़ब्त में वहशत करना

अय्यूब ख़ावर

तिलिस्म-ए-इस्म-ए-मोहब्बत है दरपय-ए-दर-ए-दिल

अय्यूब ख़ावर

सोचों में लहू उछालते हैं

अय्यूब ख़ावर

सात सुरों का बहता दरिया तेरे नाम

अय्यूब ख़ावर

सफ़र में फ़ासलों के साथ बादबान खो दिया

अय्यूब ख़ावर

न कोई दिन न कोई रात इंतिज़ार की है

अय्यूब ख़ावर

न कोई दिन न कोई रात इंतिज़ार की है

अय्यूब ख़ावर

लहरों में बदन उछालते हैं

अय्यूब ख़ावर

कोई न देखे गूँज हवा की

अय्यूब ख़ावर

किन आवाज़ों का सन्नाटा मुझ में है

अय्यूब ख़ावर

इस क़दर ग़म है कि इज़हार नहीं कर सकते

अय्यूब ख़ावर

हवा के रुख़ पे रह-ए-ए'तिबार में रक्खा

अय्यूब ख़ावर

हरीम-ए-हुस्न से आँखों के राब्ते रखना

अय्यूब ख़ावर

घर दरवाज़े से दूरी पर सात समुंदर बीच

अय्यूब ख़ावर

इक तुम कि हो बे-ख़बर सदा के

अय्यूब ख़ावर

चराग़-ए-क़ुर्ब की लौ से पिघल गया वो भी

अय्यूब ख़ावर

बुझने लगे नज़र तो फिर उस पार देखना

अय्यूब ख़ावर

बर्ग-ए-गुल शाख़-ए-हिज्र का कर दे

अय्यूब ख़ावर

अब तो आए नज़र में जो भी हो

अय्यूब ख़ावर

आँख की दहलीज़ से उतरा तो सहरा हो गया

अय्यूब ख़ावर