Heart Broken Poetry (page 226)
आ जाए न रात कश्तियों में
अय्यूब ख़ावर
उस ने हमारे हाथ में इक हाथ क्या दिया
आएशा मसूद मलिक
दीवानगी ने ख़ूब करिश्मे दिखाए हैं
अयाज़ झाँसवी
उस निगाह-ए-नाज़ ने यूँ रात-भर तज्सीम की
औरंगज़ेब
पूछते हैं तुझ को सफ़्फ़ाकी कहाँ रह कर मिली
औरंगज़ेब
निहत्ते आदमी पे बढ़ के ख़ंजर तान लेती है
औरंगज़ेब
ख़ुश बहुत आते हैं मुझ को रास्ते दुश्वार से
औरंगज़ेब
इश्क़ क्या है बेबसी है बेबसी की बात कर
औरंगज़ेब
हवस ने मुझ से पूछा था तुम्हारा क्या इरादा है
औरंगज़ेब
अश्क को दरिया बनाया आँख को साहिल किया
औरंगज़ेब
अब कोई और मुसीबत तो न पाली जाए
औरंगज़ेब
आम रस्ते से हट के आया हूँ
औरंगज़ेब
आख़िर बिगड़ गए मिरे सब काम होने तक
औरंगज़ेब
आइने से गुज़रने वाला था
औरंगज़ेब
आइना है ख़याल की हैरत
औरंगज़ेब
आ कर उरूज कैसे गिरा है ज़वाल पर
औरंगज़ेब
शिकस्ता-दिल की ख़ुशी दोस्तो ख़ुशी तो न थी
औलाद अली रिज़वी
नाव तूफ़ान में जब ज़ेर-ओ-ज़बर होती है
औलाद अली रिज़वी
न जिस का कोई सहारा हो वो किधर जाए
औलाद अली रिज़वी
ख़दशे थे शाम-ए-हिज्र के सुब्ह-ए-ख़ुशी के साथ
औलाद अली रिज़वी
गह मश्क़-ए-सितम गाह-ए-करम याद करेंगे
औलाद अली रिज़वी
चार-सू आलम-ए-इम्काँ में अँधेरा देखा
औज लखनवी
सफ़र हो शाह का या क़ाफ़िला फ़क़ीरों का
अतुल अजनबी
किसी दरख़्त से सीखो सलीक़ा जीने का
अतुल अजनबी
इक थकन क़ुव्वत-ए-इज़हार में आ जाती है
अतुल अजनबी
सफ़र-गिरफ़्ता रहे कुश्तगान-ए-नान-ओ-नमक
अतीक़ुल्लाह
पानी था मगर अपने ही दरिया से जुदा था
अतीक़ुल्लाह
इस गली से उस गली तक दौड़ता रहता हूँ मैं
अतीक़ुल्लाह
कितना मुश्किल है
अतीक़ुल्लाह
हमारे मा-बैन
अतीक़ुल्लाह