Heart Broken Poetry (page 223)
खिड़कियाँ खोल के कैसी ये सदाएँ आईं
अज़ीज़ परीहारी
बक़ा-ए-दवाम का मुसाफ़िर
अज़ीम कुरेशी
ये फूल जो मिट्टी के हयूलों से अटा है
अज़ीम कुरेशी
वो शोख़ दिल-ओ-जाँ की तमन्ना तो न निकला
अज़ीम कुरेशी
सहरा का कोई फूल मोअ'त्तर तो नहीं था
अज़ीम कुरेशी
कर्ब-ए-हिज्राँ ज़ि-बस है क्या कीजे
अज़ीम कुरेशी
इश्क़ अपना अजब तमाशा है
अज़ीम कुरेशी
बीच दिलों में उतरा तो है
अज़ीम कुरेशी
टूटा तो अज़ीज़ और हुआ अहल-ए-वफ़ा को
अज़ीम मुर्तज़ा
कुछ नक़्श तिरी याद के बाक़ी हैं अभी तक
अज़ीम मुर्तज़ा
ये और बात है कि मदावा-ए-ग़म न था
अज़ीम मुर्तज़ा
वही यकसानियत-ए-शाम-ओ-सहर है कि जो थी
अज़ीम मुर्तज़ा
नीम-शब आतिश-ए-फ़रियाद-ए-असीराँ रौशन
अज़ीम मुर्तज़ा
महरूमी के दुख और तन्हाई के रंज उठाए
अज़ीम मुर्तज़ा
लाई न सबा बू-ए-चमन अब के बरस भी
अज़ीम मुर्तज़ा
कुछ नक़्श तिरी याद के बाक़ी हैं अभी तक
अज़ीम मुर्तज़ा
कुछ भी हो मिरा हाल नुमायाँ तो नहीं है
अज़ीम मुर्तज़ा
जब से है वो रौनक़-ए-महफ़िल आँखों में
अज़ीम मुर्तज़ा
ग़म का ये सलीक़ा भी रह गया है अब हम तक
अज़ीम मुर्तज़ा
फ़ुग़ाँ से तर्क-ए-फ़ुग़ाँ तक हज़ार तिश्ना-लबी है
अज़ीम मुर्तज़ा
अफ़्साना-ए-हयात-ए-परेशाँ के साथ साथ
अज़ीम मुर्तज़ा
रस्म-ए-अंदेशा से फ़ारिग़ हुए हम
आज़र तमन्ना
यक़ीं बनाता है कोई गुमाँ बनाता है
आज़र तमन्ना
इस से पहले कि घर के पर्दों से
आज़र अस्करी
शबाब आया तड़पने और तड़पाने का वक़्त आया
अाज़म जलालाबादी
दिल को रहीन-ए-लज़्ज़त-ए-दरमाँ न कर सके
आज़म चिश्ती
पेड़ आँगन के तिरे जब बारवर हो जाएँगे
आज़ाद गुरदासपुरी
कभी नाकामियों का अपनी हम मातम नहीं करते
आज़ाद गुरदासपुरी
ये मैं था या मिरे अंदर का ख़ौफ़ था जिस ने
आज़ाद गुलाटी
समेट लो मुझे अपनी सदा के हल्क़ों में
आज़ाद गुलाटी