Heart Broken Poetry (page 230)

फूल पर ओस है आरिज़ पे नमी हो जैसे

अतीक़ अंज़र

न मिल सका तरी लहरों में भी क़रार मुझे

अतीक़ अंज़र

मिरी ज़िंदगी किसी मोड़ पर कभी आँसुओं से वफ़ा न दे

अतीक़ अंज़र

किसी ने भेजा है ख़त प्यार और वफ़ा लिख कर

अतीक़ अंज़र

कहानियाँ ख़मोश हैं पहेलियाँ उदास हैं

अतीक़ अंज़र

जिस्म के घरौंदे में आग शोर करती है

अतीक़ अंज़र

जिस की ख़ातिर मैं ने दुनिया की तरफ़ देखा न था

अतीक़ अंज़र

गुज़िश्ता रात कोई चाँद घर में उतरा था

अतीक़ अंज़र

दिल के आँगन में तिरी याद का तारा चमका

अतीक़ अंज़र

अश्क इन आँखों से हम दिल में बहा कर देखें

अतीक़ अंज़र

घर हमारा फूँक कर कल इक पड़ोसी ऐ 'अतीक़'

अतीक़ इलाहाबादी

देव परी के क़िस्से सुन कर

अतीक़ इलाहाबादी

ज़ब्त की हद से हो के गुज़रना सो जाना

अतीक़ इलाहाबादी

जुदाई हद से बढ़ी तो विसाल हो ही गया

अतीक़ इलाहाबादी

हम तो बिछड़ के रो लेते हैं

अतीक़ इलाहाबादी

चंद लम्हों को सही था साथ में रहना बहुत

अतीक़ इलाहाबादी

अगरचे लाई थी कल रात कुछ नजात हवा

अतीक़ इलाहाबादी

शजर से मिल के जो रोने लगा था

अतीक़ अहमद

मैं अपनी ख़ाक को जब आइना बनाता हूँ

अतीक़ अहमद

वक़्त ने लूटे हैं हस्ती के ख़ज़ाने कितने

अतीब एजाज़

गुमाँ के तन पे यक़ीं का लिबास रहने दो

अतीब एजाज़

दिल पे यादों का बोझ तारी है

अतीब एजाज़

दिल की दहलीज़ पे दिलबर आया

अतीब एजाज़

तिलिस्म-ए-शब से बहुत बे-ख़बर चले आए

अताउर्रहमान क़ाज़ी

किसे दिमाग़ कि उलझे तिलिस्म-ए-ज़ात के साथ

अताउर्रहमान क़ाज़ी

तिरी आँखों में इक मुबहम फ़साना ढूँढ ही लेगा

अताउर्रहमान जमील

शोहरत-ए-फ़न बहुत हुई दाद कमाल दे गए

अताउर्रहमान जमील

माना कि सितारे सर-ए-अफ़्लाक बहुत हैं

अताउर्रहमान जमील

कुछ ख़्वाब कुछ ख़याल में मस्तूर हो गए

अताउर्रहमान जमील

कहाँ गए शब-ए-महताब के जमाल-ज़दा

अताउर्रहमान जमील