Heart Broken Poetry (page 267)
ये तन्हाई ये उज़्लत ऐ दिल ऐ दिल
अनवर शऊर
ये मत पूछो कि कैसा आदमी हूँ
अनवर शऊर
यादों के बाग़ से वो हरा-पन नहीं गया
अनवर शऊर
याद करो जब रात हुई थी
अनवर शऊर
उस बज़्म में क्या कोई सुने राय हमारी
अनवर शऊर
उन की सूरत हमें आई थी पसंद आँखों से
अनवर शऊर
टूटा तिलिस्म-ए-वक़्त तो क्या देखता हूँ मैं
अनवर शऊर
सुलैमान-ए-सुख़न तो ख़ैर क्या हूँ
अनवर शऊर
'शुऊर' वक़्त पे दिल की दवा हुई होती
अनवर शऊर
रही रात उन से मुलाक़ात कम
अनवर शऊर
पियो कि मा-हसल-ए-होश किस ने देखा है
अनवर शऊर
नहीं मिलते 'शुऊर' आँसू बहाते
अनवर शऊर
न सह सकूँगा ग़म-ए-ज़ात गो अकेला मैं
अनवर शऊर
मुझे ये जुस्तुजू क्यूँ हो कि क्या हूँ और किया था मैं
अनवर शऊर
मिरी हयात है बस रात के अँधेरे तक
अनवर शऊर
मैं ख़ाक हूँ आब हूँ हवा हूँ
अनवर शऊर
क्या बे-मुरव्वती का शिकवा गिला किसी से
अनवर शऊर
कुछ दिनों अपने घर रहा हूँ मैं
अनवर शऊर
कुछ दिन तो कर तआ'वुन ऐ ख़ुश-सिफ़ात मुझ से
अनवर शऊर
कट चुकी थी ये नज़र सब से बहुत दिन पहले
अनवर शऊर
जो सुनता हूँ कहूँगा मैं जो कहता हूँ सुनूँगा मैं
अनवर शऊर
जो जल उठी है शबिस्ताँ में याद सी क्या है
अनवर शऊर
इत्तिफ़ाक़ अपनी जगह ख़ुश-क़िस्मती अपनी जगह
अनवर शऊर
हो गए दिन जिन्हें भुलाए हुए
अनवर शऊर
गो कठिन है तय करना उम्र का सफ़र तन्हा
अनवर शऊर
फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था
अनवर शऊर
बुरा बुरे के अलावा भला भी होता है
अनवर शऊर
बशारत हो कि अब मुझ सा कोई पागल न आएगा
अनवर शऊर
और न दर-ब-दर फिरा और न आज़मा मुझे
अनवर शऊर
ऐसे देखा है कि देखा ही न हो
अनवर शऊर