Heart Broken Poetry (page 268)

आवारा हूँ रैन-बसेरा कोई नहीं मेरा

अनवर शऊर

पागलों की मद्ह में

अनवर सेन रॉय

लेकिन

अनवर सेन रॉय

कल वालों के लिए

अनवर सेन रॉय

इज़ाफ़ी ज़रूरतों के लिए एक नज़्म

अनवर सेन रॉय

एक मंसूबे में दर-पेश दुश्वारियाँ

अनवर सेन रॉय

ब'अद-अज़-मर्ग

अनवर सेन रॉय

अपने लिए एक नौहा

अनवर सेन रॉय

रंगीं बना के दामन-ए-ज़ख़्म-ए-जिगर को मैं

अनवर सहारनपुरी

जल्वे दिखाए यार ने अपनी हरीम-ए-नाज़ में

अनवर सहारनपुरी

जब फ़स्ल-ए-बहाराँ आती है शादाब गुलिस्ताँ होते हैं

अनवर सहारनपुरी

आबाद अब न होगा मय-ख़ाना ज़िंदगी का

अनवर सहारनपुरी

यूँ तसल्ली को तो इक याद भी काफ़ी थी मगर

अनवर सदीद

उस के बग़ैर ज़िंदगी कितनी फ़ुज़ूल है

अनवर सदीद

सैल-ए-ज़माँ में डूब गए मशहूर-ए-ज़माना लोग

अनवर सदीद

जो फूल झड़ गए थे जो आँसू बिखर गए

अनवर सदीद

दुख के ताक़ पे शाम ढले

अनवर सदीद

नया शहर

अनवर सदीद

ज़ोर से आँधी चली तो बुझ गए सारे चराग़

अनवर सदीद

उस की अना के बुत को बड़ा कर के देखते

अनवर सदीद

तुझ को तो क़ुव्वत-ए-इज़हार ज़माने से मिली

अनवर सदीद

तलाश जिस को मैं करता फिरा ख़राबों में

अनवर सदीद

साँसों में मिल गई तिरी साँसों की बास थी

अनवर सदीद

सफ़ीना ले गए मौजों की गर्म-जोशी में

अनवर सदीद

पीले पीले चेहरों में उभरी है आज की शाम

अनवर सदीद

मौसम सर्द हवाओं का

अनवर सदीद

ख़्वाबों की तफ़्सील बता कर जाएँगे

अनवर सदीद

दुश्मन तो मेरे तन से लहू चूसता रहा

अनवर सदीद

दीवार पर लिखा न पढ़ो और ख़ुश रहो

अनवर सदीद

अहद-ए-हाज़िर इक मशीन और उस का कारिंदा हूँ मैं

अनवर सदीद