Heart Broken Poetry (page 270)

मैं तो समझा था जिस वक़्त मुझ को वो मिलेंगे तो जन्नत मिलेगी

अनवर मिर्ज़ापुरी

किसी सूरत भी नींद आती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ

अनवर मिर्ज़ापुरी

इस वास्ते दामन चाक किया शायद ये जुनूँ काम आ जाए

अनवर मिर्ज़ापुरी

मख़मली ख़्वाब का आँखों में न मंज़र फैला

अनवर मीनाई

महफ़ूज़ रहेगा क्या एहसास का आईना

अनवर मीनाई

ख़्वाब बिखरेंगे तो हम को भी बिखरना होगा

अनवर मीनाई

जब ज़मीं के मुक़द्दर सँवर जाएँगे

अनवर मीनाई

हर मंज़र-ए-ख़ुश-रंग सुलग जाए तो क्या हो

अनवर मीनाई

हर दम दुआ-ए-आब-ओ-हवा माँगते रहे

अनवर मीनाई

एहसास की रगों में उतरने लगा है वो

अनवर मीनाई

बड़े सुकून से ख़ुद अपने हम-सरों में रहे

अनवर मीनाई

आज मुझे कुछ लोग मिले हैं पागल से

अनवर मीनाई

जुदा होगी कसक दिल से न उस की

अनवर मसूद

हमें क़रीना-ए-रंजिश कहाँ मयस्सर है

अनवर मसूद

दिल जो टूटेगा तो इक तरफ़ा चराग़ाँ होगा

अनवर मसूद

ऐ दिल-ए-नादाँ किसी का रूठना मत याद कर

अनवर मसूद

मेरी पहली नज़्म

अनवर मसूद

उसे तो पास-ए-ख़ुलूस-ए-वफ़ा ज़रा भी नहीं

अनवर मसूद

सर-दर्द में गोली ये बड़ी ज़ूद-असर है

अनवर मसूद

रात आई है बलाओं से रिहाई देगी

अनवर मसूद

पढ़ने भी न पाए थे कि वो मिट भी गई थी

अनवर मसूद

मुझे ख़ुद से भी खटका सा लगा था

अनवर मसूद

मेरी क़िस्मत कि वो अब हैं मिरे ग़म-ख़्वारों में

अनवर मसूद

मैं जुर्म-ए-ख़मोशी की सफ़ाई नहीं देता

अनवर मसूद

मैं देख भी न सका मेरे गिर्द क्या गया था

अनवर मसूद

क्यूँ किसी और को दुख दर्द सुनाऊँ अपने

अनवर मसूद

कैसी कैसी आयतें मस्तूर हैं नुक़्ते के बीच

अनवर मसूद

कब ज़िया-बार तिरा चेहरा-ए-ज़ेबा होगा

अनवर मसूद

कब तलक यूँ धूप छाँव का तमाशा देखना

अनवर मसूद

जो बारिशों में जले तुंद आँधियों में जले

अनवर मसूद