Heart Broken Poetry (page 269)

आरज़ू थी ये बिखेरें अपनी किरनें सुब्ह तक

अनवर सदीद

मैं जो रोया उन की आँखों में भी आँसू आ गए

अनवर साबरी

वो नीची निगाहें वो हया याद रहेगी

अनवर साबरी

वक़्त जब करवटें बदलता है

अनवर साबरी

उन की महफ़िल में हमेशा से यही देखा रिवाज

अनवर साबरी

तसव्वुर के सहारे यूँ शब-ए-ग़म ख़त्म की मैं ने

अनवर साबरी

तलख़ाबा-ए-ग़म ख़ंदा-जबीं हो के पिए जा

अनवर साबरी

रहते हुए क़रीब जुदा हो गए हो तुम

अनवर साबरी

निगाह-ओ-दिल से गुज़री दास्ताँ तक बात जा पहुँची

अनवर साबरी

न होंगे हम तो ये रंग-ए-गुलिस्ताँ कौन देखेगा

अनवर साबरी

मुद्दतों से कोई पैग़ाम नहीं आता है

अनवर साबरी

लब पे काँटों के है फ़रियाद-ओ-बुका मेरे बाद

अनवर साबरी

कुछ अबरुओं पे बल भी हैं ख़ंदा-लबी के साथ

अनवर साबरी

इश्क़ में ग़म के सिवा कोई ख़ुशी देखी नहीं

अनवर साबरी

इंक़िलाब-ए-सहर-ओ-शाम इलाही तौबा

अनवर साबरी

हासिल-ए-ग़म यही समझते हैं

अनवर साबरी

हर साँस में ख़ुद अपने न होने का गुमाँ था

अनवर साबरी

दौर-ए-हाज़िर हो गया है इस क़दर कम-आश्ना

अनवर साबरी

अता-ए-ग़म पे भी ख़ुश हूँ मिरी ख़ुशी क्या है

अनवर साबरी

तमसील

अनवर नदीम

मंज़िल-ए-शौक़

अनवर नदीम

कहीं और ही चलना होगा

अनवर नदीम

उसी अमल की ज़रा सी शराब देता चल

अनवर नदीम

शेर-ओ-सुख़न की उस महफ़िल में सब से छोटे हम ही थे

अनवर नदीम

प्यार को पा कर जो महरूमी हुई

अनवर नदीम

क्या सुनाएँ तुम्हें कोई ताज़ा ग़ज़ल

अनवर नदीम

अकेला पा के मुझ को याद उन की आ तो जाती है

अनवर मिर्ज़ापुरी

यहाँ काँप जाते हैं फ़लसफ़े ये बड़ा अजीब मक़ाम है

अनवर मिर्ज़ापुरी

वादा-ए-शाम-ए-फ़र्दा पे ऐ दिल मुझे गर यक़ीं ही न आए तो मैं क्या करूँ

अनवर मिर्ज़ापुरी

रुख़ से पर्दा उठा दे ज़रा साक़िया बस अभी रंग-ए-महफ़िल बदल जाएगा

अनवर मिर्ज़ापुरी