Heart Broken Poetry (page 265)
वो कारवान-ए-बहाराँ कि बे-दरा होगा
आरिफ़ अब्दुल मतीन
तितलियाँ रंगों का महशर हैं कभी सोचा न था
आरिफ़ अब्दुल मतीन
तिरे बाज़ूओं का सहारा तो ले लूँ मगर उन में भी रच गई है थकन
आरिफ़ अब्दुल मतीन
तिरे बाज़ुओं का सहारा तो ले लूँ मगर इन में भी रच गई है थकन
आरिफ़ अब्दुल मतीन
रूह के जलते ख़राबे का मुदावा भी नहीं
आरिफ़ अब्दुल मतीन
मेरी सोच लरज़ उट्ठी है देख के प्यार का ये आलम
आरिफ़ अब्दुल मतीन
मैं अज़ल का राह-रौ मुझ को अबद की जुस्तुजू
आरिफ़ अब्दुल मतीन
कितनी हसरत से तिरी आँख का बादल बरसा
आरिफ़ अब्दुल मतीन
जो उभरे वक़्त के साँचे में ढल के
आरिफ़ अब्दुल मतीन
हम भी नादाँ हैं समझते हैं कि छट जाएगी
आरिफ़ अब्दुल मतीन
ढूँढता हूँ सर-ए-सहरा-ए-तमन्ना ख़ुद को
आरिफ़ अब्दुल मतीन
चाँद मेरे घर में उतरा था कहीं डूबा न था
आरिफ़ अब्दुल मतीन
बजा कि कश्ती है पारा पारा थपेड़े तूफ़ाँ के खा रहा हूँ
आरिफ़ अब्दुल मतीन
'आरिफ़' अज़ल से तेरा अमल मोमिनाना था
आरिफ़ अब्दुल मतीन
नज़र गुम हो गई जल्वों में 'आरिफ़'
आरिफ़ अब्बासी
चश्म-ए-मुश्ताक़ तमाशा-ए-करम चाहे है
आरिफ़ अब्बासी
मुझे महरूमियों का ग़म नहीं है
आरिफ़ अब्बास
या ख़ुदा कुछ तो दर्द कम कर दे
आराधना प्रसाद
आज की तारीख़ में इंसाँ मुकम्मल कौन है
आराधना प्रसाद
ज़िंदगी मुझ को मिरी नज़रों में शर्मिंदा न कर
अक़ील शादाब
शायद कोई कमी मेरे अंदर कहीं पे है
अक़ील शादाब
मेरे ज़ेहन-ओ-दिल में फ़िक्र-ओ-फ़न में था
अक़ील शादाब
मताअ-ओ-माल न दे दौलत-ए-तबाही दे
अक़ील शादाब
मय-कशो जान के लाले नज़र आते हैं मुझे
अक़ील शादाब
लिबास गर्द का और जिस्म नूर का निकला
अक़ील शादाब
हवस-परस्ती ओ ग़ारत-गरी की लत न गई
अक़ील शादाब
हवस का रंग चढ़ा उस पे और उतर भी गया
अक़ील शादाब
बाइ'स-ए-अर्ज़-ए-हुनर कर्ब-ए-निहानी निकला
अक़ील शादाब
असर मिरी ज़बान में नहीं रहा
अक़ील शादाब
शायद कहीं इस प्यार में थोड़ी सी कमी है
अक़ील नोमानी