Heart Broken Poetry (page 263)

गुज़रते दिन के दुखों का पता तो देता था

अरमान नज्मी

घनी आबादियों की बे-अमानी का तमाशा कर

अरमान नज्मी

इक बे-निशान हर्फ़-ए-सदा की तरफ़ न देख

अरमान नज्मी

दिमाग़-ओ-दिल पे हो क्या असर अँधेरे का

अरमान नज्मी

भूल गया ख़ुश्की में रवानी

अरमान नज्मी

ब-ज़ाहिर ये वही मिलने बिछड़ने की हिकायत है

अरमान नज्मी

अपनी सच्चाई का आज़ार जो पाले हुए हैं

अरमान नज्मी

सूरज उगा तो ज़िंदगी की शाम हो गई

अर्जुमंद बानो अफ़्शाँ

कभी जो ख़त्म न हो ऐसी ताज़गी दे दी

अर्जुमंद बानो अफ़्शाँ

जो राह चलना है ख़ुद ही चुन लो यहाँ कोई राहबर नहीं है

अर्जुमंद बानो अफ़्शाँ

जब सितारों की रिदा काँधे से सरकाती है रात

अर्जुमंद बानो अफ़्शाँ

हम हैं और ज़ब्त-ए-फ़ुग़ाँ है आज-कल

अर्जुमंद बानो अफ़्शाँ

बदली हुई दुनिया की नज़र देख रहे हैं

अर्जुमंद बानो अफ़्शाँ

वो क्या मस्लहत थी

आरिफ़ा शहज़ाद

वहाँ मैं नहीं थी

आरिफ़ा शहज़ाद

तुम्हें खोजती हैं जो आँखें

आरिफ़ा शहज़ाद

गिर्हें खुलती नहीं

आरिफ़ा शहज़ाद

कैसा मातम कैसा रोना मिट्टी का

आरिफ़ शफ़ीक़

ग़रीब-ए-शहर तो फ़ाक़े से मर गया 'आरिफ़'

आरिफ़ शफ़ीक़

तू ज़मीं पर है कहकशाँ जैसा

आरिफ़ शफ़ीक़

कैसा मातम कैसा रोना मिट्टी का

आरिफ़ शफ़ीक़

जो अपनी ख़्वाहिशों में तू ने कुछ कमी कर ली

आरिफ़ शफ़ीक़

जब भी दुश्मन बन के इस ने वार किया

आरिफ़ शफ़ीक़

हमें नज़दीक कब दिल की मोहब्बत खींच लाती है

आरिफ़ शफ़ीक़

घर से चीख़ें उठ रही थीं और मैं जागा न था

आरिफ़ शफ़ीक़

दोज़ख़ भी क्या गुमान है जन्नत भी है फ़रेब

आरिफ़ शफ़ीक़

बादबाँ को गिला हवाओं से

आरिफ़ शफ़ीक़

अंधे अदम वजूद के गिर्दाब से निकल

आरिफ़ शफ़ीक़

तुम्हें प्यार है, तो यक़ीन दो,

आरिफ़ इशतियाक़

ज़िंदगी यूँ करें बसर कब तक

आरिफ़ इशतियाक़