Heart Broken Poetry (page 262)
मेरा वतन
अर्श मलसियानी
मैं क्यूँ भूल जाऊँ
अर्श मलसियानी
हिन्दोस्तान मेरा
अर्श मलसियानी
दीवाली
अर्श मलसियानी
15 अगस्त (1949)
अर्श मलसियानी
ज़ख़्म-ए-दिल भी दिखा के देख लिया
अर्श मलसियानी
ये दुनिया है उसे दार-उल-फ़ितन कहना ही पड़ता है
अर्श मलसियानी
ये दौर-ए-ख़िरद है दौर-ए-जुनूँ इस दौर में जीना मुश्किल है
अर्श मलसियानी
वो ले के हौसला-ए-अज़्म-ए-बे-पनाह चले
अर्श मलसियानी
तू अगर दिल में एक बार आए
अर्श मलसियानी
तरब के मख़मसे ग़म के झमेले
अर्श मलसियानी
पहला सा वो जुनून-ए-मोहब्बत नहीं रहा
अर्श मलसियानी
नैरंगी-ए-बहार-ओ-ख़िज़ाँ देखते रहे
अर्श मलसियानी
मोहब्बत सोज़ भी है साज़ भी है
अर्श मलसियानी
लुत्फ़ ही लुत्फ़ है जो कुछ है इनायत के सिवा
अर्श मलसियानी
ख़ाना-ए-दिल में दाग़ जल न सका
अर्श मलसियानी
इश्क़-ए-बुताँ का ले के सहारा कभी कभी
अर्श मलसियानी
एहसास-ए-हुस्न बन के नज़र में समा गए
अर्श मलसियानी
दिल-ए-फ़सुर्दा पे सौ बार ताज़गी आई
अर्श मलसियानी
दर्द का हाल आह से पूछो
अर्श मलसियानी
बचा क्या रह गया कालक भरे झुलसे मकानों में
अरमान नज्मी
हिना-रंग हाथों में
अरमान नज्मी
ताज-ए-ज़र्रीं न कोई मसनद-ए-शाही माँगूँ
अरमान नज्मी
तह-ए-अफ़्लाक ही सब कुछ नहीं है
अरमान नज्मी
पिछली रफ़ाक़तों का न इतना मलाल कर
अरमान नज्मी
निगाह-ए-तिश्ना से हैरत का बाब देखते हैं
अरमान नज्मी
नज़र के सामने सहरा-ए-बे-पनाही है
अरमान नज्मी
न हर्फ़-ए-शौक़ न तर्ज़-ए-बयाँ से आती है
अरमान नज्मी
जो गुम-गश्ता है उस की ज़ात क्या है
अरमान नज्मी
जाने किस आलम-ए-एहसास में खोए हुए हैं
अरमान नज्मी