Heart Broken Poetry (page 260)
बोलेगा कौन आशिक़-ए-नादार की तरफ़
अरशद अली ख़ान क़लक़
बे-ज़बानों को भी गोयाई सिखाना चाहिए
अरशद अली ख़ान क़लक़
बशर के फ़ैज़-ए-सोहबत से लियाक़त आ ही जाती है
अरशद अली ख़ान क़लक़
अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का
अरशद अली ख़ान क़लक़
आश्ना होते ही उस इश्क़ ने मारा मुझ को
अरशद अली ख़ान क़लक़
आशिक़-ए-गेसू-ओ-क़द तेरे गुनहगार हैं सब
अरशद अली ख़ान क़लक़
आरिज़ में तुम्हारे क्या सफ़ा है
अरशद अली ख़ान क़लक़
आएँगे वो तो आप में हरगिज़ न आएँगे
अरशद अली ख़ान क़लक़
ये किस को याद किया रूह की ज़रूरत ने
अरशद अब्दुल हमीद
मिट्टी को चूम लेने की हसरत ही रह गई
अरशद अब्दुल हमीद
मिले जो उस से तो यादों के पर निकल आए
अरशद अब्दुल हमीद
मैं अपने आप को भी देखने से क़ासिर हूँ
अरशद अब्दुल हमीद
शर्त-ए-दीवार-ओ-दर-ओ-बाम उठा दी है तो क्या
अरशद अब्दुल हमीद
रुकते हुए क़दमों का चलन मेरे लिए है
अरशद अब्दुल हमीद
मुझ को तक़दीर ने यूँ बे-सर-ओ-आसार किया
अरशद अब्दुल हमीद
मुझ सा बेताब यहाँ कोई नहीं मेरे सिवा
अरशद अब्दुल हमीद
मिले जो उस से तो यादों के पर निकल आए
अरशद अब्दुल हमीद
मिरे ख़ेमे ख़स्ता-हाल में हैं मिरे रस्ते धुँद के जाल में हैं
अरशद अब्दुल हमीद
मेरे अशआर तमव्वुज पे जो आए हुए हैं
अरशद अब्दुल हमीद
मेहर ओ महताब को मेरे ही निशाँ जानती है
अरशद अब्दुल हमीद
लकीर-ए-संग को अन्क़ा-मिसाल हम ने किया
अरशद अब्दुल हमीद
कोई भी शय हो मियाँ जान से प्यारी किसे है
अरशद अब्दुल हमीद
ख़ामोशी तक तो एक सदा ले गई मुझे
अरशद अब्दुल हमीद
जिंस-ए-मख़लूत हैं और अपने ही आज़ार में हैं
अरशद अब्दुल हमीद
इश्क़ मरहून-ए-हिकायात-ओ-गुमाँ भी होगा
अरशद अब्दुल हमीद
हवा-ए-हिर्स-ओ-हवस से मफ़र भी करना है
अरशद अब्दुल हमीद
है टोंक अर्ज़-ए-पाक वहीं से उठेंगे हम
अरशद अब्दुल हमीद
ग़ज़ल में जान पड़ी गुफ़्तुगू में फूल खिले
अरशद अब्दुल हमीद
घटाएँ घिरती हैं बिजली कड़क के गिरती है
अरशद अब्दुल हमीद
ग़लत नहीं है दिल-ए-सुल्ह-ख़ू जो बोलता है
अरशद अब्दुल हमीद