Heart Broken Poetry (page 258)

नित-नए नक़्श से बातिन को सजाता हुआ मैं

अरशद जमाल 'सारिम'

क्या कहूँ कितनी अज़िय्यत से निकाली गई शब

अरशद जमाल 'सारिम'

क्या कहूँ कितना फ़ुज़ूँ है तेरे दीवाने का दुख

अरशद जमाल 'सारिम'

कहाँ कहाँ से सुनाऊँ तुम्हें फ़साना-ए-शब

अरशद जमाल 'सारिम'

इज़्तिराब ऐसा हुआ दिल का सहारा मुझ को

अरशद जमाल 'सारिम'

फ़ना हुआ तो मैं तार-ए-नफ़स में लौट आया

अरशद जमाल 'सारिम'

दिखाती है जो ये दुनिया वो बैठा देखता हूँ मैं

अरशद जमाल 'सारिम'

बे-अमाँ हूँ इन दिनों मैं दर-ब-दर फिरता हूँ मैं

अरशद जमाल 'सारिम'

बस कि इक लम्स की उम्मीद पे वारे हुए हैं

अरशद जमाल 'सारिम'

उस का अंजाम भला हो कि बुरा हो कुछ हो

अरशद जमाल हश्मी

सपेदी रंग-ए-जहाँ में नहीं मिलाता हूँ

अरशद जमाल हश्मी

ख़्वाब क्या है कि टूटता ही नहीं

अरशद जमाल हश्मी

आँखों में ख़्वाब रख दिए ता'बीर छीन ली

अरशद जमाल हश्मी

याद दिलवाइए उन को जो कभी वादा-ए-वस्ल

अरशद अली ख़ान क़लक़

सितम वो तुम ने किए भूले हम गिला दिल का

अरशद अली ख़ान क़लक़

राह-ए-हक़ में खेल जाँ-बाज़ी है ओ ज़ाहिर-परस्त

अरशद अली ख़ान क़लक़

'क़लक़' ग़ज़लें पढ़ेंगे जा-ए-कुरआँ सब पस-ए-मुर्दन

अरशद अली ख़ान क़लक़

मुझ से उन आँखों को वहशत है मगर मुझ को है इश्क़

अरशद अली ख़ान क़लक़

लाग़र ऐसा वहशत-ए-इश्क़-ए-लब-ए-शीरीं में हूँ

अरशद अली ख़ान क़लक़

कुफ्र-ओ-इस्लाम के झगड़ों से छुड़ाया सद-शुक्र

अरशद अली ख़ान क़लक़

ख़त में लिक्खी है हक़ीक़त दश्त-गर्दी की अगर

अरशद अली ख़ान क़लक़

बुत-परस्ती में भी भूली न मुझे याद-ए-ख़ुदा

अरशद अली ख़ान क़लक़

बहार आते ही ज़ख़्म-ए-दिल हरे सब हो गए मेरे

अरशद अली ख़ान क़लक़

बा'द मेरे जो किया शाद किसी को तो कहा

अरशद अली ख़ान क़लक़

अपने बेगाने से अब मुझ को शिकायत न रही

अरशद अली ख़ान क़लक़

अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का

अरशद अली ख़ान क़लक़

आख़िर इंसान हूँ पत्थर का तो रखता नहीं दिल

अरशद अली ख़ान क़लक़

ये बोले जो उन को कहा बे-मुरव्वत

अरशद अली ख़ान क़लक़

यार के नर्गिस-ए-बीमार का बीमार रहा

अरशद अली ख़ान क़लक़

यगाना उन का बेगाना है बेगाना यगाना है

अरशद अली ख़ान क़लक़