Heart Broken Poetry (page 257)

जब मैं उस आदमी से दूर हुआ

अरशद लतीफ़

एक सूरत तिरी बनाने में

अरशद लतीफ़

ये माना सैल-ए-अश्क-ए-ग़म नहीं कुछ कम मगर 'अरशद'

अरशद कमाल

ख़ाक-ए-सहरा तो बहुत दूर है ऐ वहशत-ए-दिल

अरशद कमाल

कभी उन का नहीं आना ख़बर के ज़ैल में था

अरशद कमाल

ज़िम्मेदारी

अरशद कमाल

नफ़ी ओ इसबात

अरशद कमाल

ख़दशा

अरशद कमाल

धूप छाँव के दरमियाँ

अरशद कमाल

ज़माना कुछ भी कहे तेरी आरज़ू कर लूँ

अरशद कमाल

तलातुम है न जाँ-लेवा भँवर है

अरशद कमाल

समुंदर से किसी लम्हे भी तुग़्यानी नहीं जाती

अरशद कमाल

सच की ख़ातिर सब कुछ खोया कौन लिखेगा

अरशद कमाल

कुछ तो मिल जाए कहीं दीदा-ए-पुर-नम के सिवा

अरशद कमाल

किया है मैं ने ऐसा क्या कि ऐसा हो गया है

अरशद कमाल

कभी अंगड़ाई ले कर जब समुंदर जाग उठता है

अरशद कमाल

हम ज़ीस्त की मौजों से किनारा नहीं करते

अरशद कमाल

हर एक लम्हा-ए-ग़म बहर-ए-बे-कराँ की तरह

अरशद कमाल

फ़िक्र सोई है सर-ए-शाम जगा दी जाए

अरशद कमाल

इक लफ़्ज़ आ गया था जो मेरी ज़बान पर

अरशद कमाल

दर्द की साकित नदी फिर से रवाँ होने को है

अरशद कमाल

ऐ दिल तिरे तुफ़ैल जो मुझ पर सितम हुए

अरशद कमाल

उन की फ़ितरत उस को कहिए या कि फ़ितरत का उसूल

अरशद काकवी

न जाने उस ने खुले आसमाँ में क्या देखा

अरशद जमाल 'सारिम'

क्या कहूँ कितना फ़ुज़ूँ है तेरे दीवाने का दुख

अरशद जमाल 'सारिम'

हर एक शाख़ पे वीरानियाँ मुसल्लत हैं

अरशद जमाल 'सारिम'

देख ऐ मेरी ज़बूँ-हाली पे हँसने वाले

अरशद जमाल 'सारिम'

ये ख़ाकी पैरहन इक इस्म की बंदिश में रहता है

अरशद जमाल 'सारिम'

प्यास हर ज़र्रा-ए-सहरा की बुझाई गई है

अरशद जमाल 'सारिम'

पलट कर देखने का मुझ में यारा ही नहीं था

अरशद जमाल 'सारिम'