Heart Broken Poetry (page 259)
वाइज़ की ज़िद से रिंदों ने रस्म-ए-जदीद की
अरशद अली ख़ान क़लक़
वा'दा-ख़िलाफ़ कितने हैं ऐ रश्क-ए-माह आप
अरशद अली ख़ान क़लक़
था क़स्द-ए-क़त्ल-ए-ग़ैर मगर मैं तलब हुआ
अरशद अली ख़ान क़लक़
तासीर जज़्ब मस्तों की हर हर ग़ज़ल में है
अरशद अली ख़ान क़लक़
सोते हैं फैल फैल के सारे पलंग पर
अरशद अली ख़ान क़लक़
सितम वो तुम ने किए भूले हम गिला दिल का
अरशद अली ख़ान क़लक़
शरफ़ इंसान को कब ज़िल्ल-ए-हुमा देता है
अरशद अली ख़ान क़लक़
रोज़-ए-अव्वल से असीर ऐ दिल-ए-नाशाद हैं हम
अरशद अली ख़ान क़लक़
रग-ओ-पै में भरा है मेरे शोर उस की मोहब्बत का
अरशद अली ख़ान क़लक़
परतव-ए-रुख़ का तिरे दिल में गुज़र रहता है
अरशद अली ख़ान क़लक़
परतव पड़ा जो आरिज़-ए-गुलगून-ए-यार का
अरशद अली ख़ान क़लक़
नहीं चमके ये हँसने में तुम्हारे दाँत अंजुम से
अरशद अली ख़ान क़लक़
न वो ख़ुशबू है गुलों में न ख़लिश ख़ारों में
अरशद अली ख़ान क़लक़
न कल तक थे वो मुँह लगाने के क़ाबिल
अरशद अली ख़ान क़लक़
मिलता है क़ैद-ए-ग़म में भी लुत्फ़-ए-फ़ज़ा-ए-बाग़
अरशद अली ख़ान क़लक़
लूटे मज़े जो हम ने तुम्हारे उगाल के
अरशद अली ख़ान क़लक़
लुट रही है दौलत-ए-दीदार क़ैसर-बाग़ में
अरशद अली ख़ान क़लक़
जुनूँ बरसाए पत्थर आसमाँ ने मज़रा-ए-जाँ पर
अरशद अली ख़ान क़लक़
जो साक़िया तू ने पी के हम को दिया है जाम-ए-शराब आधा
अरशद अली ख़ान क़लक़
इश्क़ में तेरे जान-ए-ज़ार हैफ़ है मुफ़्त में चली
अरशद अली ख़ान क़लक़
हुज़ूर-ए-ग़ैर तुम उश्शाक़ की तहक़ीर करते हो
अरशद अली ख़ान क़लक़
हम ने एहसान असीरी का न बर्बाद किया
अरशद अली ख़ान क़लक़
हैं तेग़-ए-नाज़-ए-यार के बिस्मिल अलग अलग
अरशद अली ख़ान क़लक़
गुलों पर साफ़ धोका हो गया रंगीं कटोरी का
अरशद अली ख़ान क़लक़
गर दिल में कर के सैर-ए-दिल-ए-दाग़-दार देख
अरशद अली ख़ान क़लक़
डोरा नहीं है सुरमे का चश्म-ए-सियाह में
अरशद अली ख़ान क़लक़
दिल में आते ही ख़ुशी साथ ही इक ग़म आया
अरशद अली ख़ान क़लक़
दफ़्तर जो गुलों के वो सनम खोल रहा है
अरशद अली ख़ान क़लक़
बुत-परस्ती ने किया आशिक़-ए-यज़्दाँ मुझ को
अरशद अली ख़ान क़लक़
बुत-परस्ती ने किया आशिक़-ए-यज़्दाँ मुझ को
अरशद अली ख़ान क़लक़