Heart Broken Poetry (page 256)

यक़ीन-ए-सुब्ह-ए-चमन है कितना शुऊर-ए-अब्र-ए-बहार क्या है

अर्शी भोपाली

उफ़ुक़ के ख़ूनीं धुँदलकों का सुब्ह नाम नहीं

अर्शी भोपाली

तमाम हुस्न-ए-जहाँ का जवाब हो के रहा

अर्शी भोपाली

शौक़-ए-आवारा दश्त-ओ-दर से है

अर्शी भोपाली

रक़्स-ए-आशुफ़्ता-सरी की कोई तदबीर सही

अर्शी भोपाली

निगाह-ए-शौक़ से कब तक मुक़ाबला करते

अर्शी भोपाली

नशीली छाँव में बीते हुए ज़मानों को

अर्शी भोपाली

न सहरा है न अब दीवार-ओ-दर है

अर्शी भोपाली

मता-ए-शौक़ तो है दर्द-ए-रोज़गार तो है

अर्शी भोपाली

ख़ुलूस-ए-अल्फ़ाज़ काम आया निगाह-ए-अहल-ए-फ़ितन से पहले

अर्शी भोपाली

फ़लसफ़ी किस लिए इल्ज़ाम-ए-फ़ना देता है

अर्शी भोपाली

दर्द के साँचे में ढल कर रह गई

अर्शी भोपाली

आग़ाज़-ए-आशिक़ी का अल्लाह रे ज़माना

अर्शी भोपाली

वीराँ वीराँ बाम-ओ-दर मैं और मिरी तन्हाई

अरशदुल क़ादरी

हो इंतिज़ार किसी का मगर मिरी नज़रें

अरशद सिद्दीक़ी

फ़ज़ा है तीरा ओ तारीक और उस का ख़याल

अरशद सिद्दीक़ी

वो जिस ने मेरे दिल ओ जाँ में दर्द बोया है

अरशद सिद्दीक़ी

क़ल्ब-ओ-नज़र का सुकूँ और कहाँ दोस्तो

अरशद सिद्दीक़ी

न पयाम चाहते हैं न कलाम चाहते हैं

अरशद सिद्दीक़ी

फ़ज़ाएँ कैफ़-ए-बहाराँ से जब महकती हैं

अरशद सिद्दीक़ी

तेशा-ए-कर्ब

अरशद मेराज

लहू के साथ तबीअत में सनसनाती फिरे

अरशद मलिक

मैं ख़ाक छानता हूँ आफ़्ताब देखता हूँ

अरशद महमूद नाशाद

हम जुनूँ पेशा कि रहते थे तिरी ज़ात में गुम

अरशद महमूद नाशाद

मैं ने उसी से हाथ मिलाया था और बस

अरशद महमूद अरशद

ख़ुदी के ज़ो'म में ऐसा वो मुब्तला हुआ है

अरशद महमूद अरशद

कहीं तो फेंक ही देंगे ये बार साँसों का

अरशद महमूद अरशद

तिरे ख़याल से फिर आँख मेरी पुर-नम है

अरशद लतीफ़

सुरूर-ए-इश्क़ ने उल्फ़त से बाँध रक्खा है

अरशद लतीफ़

मोहब्बत सिर्फ़ इक जज़्बा नहीं है

अरशद लतीफ़