Heart Broken Poetry (page 254)
हमारी नाकामी-ए-वफ़ा ने ज़माने की खोल दी हैं आँखें
आरज़ू लखनवी
फ़ज़ा महदूद कब है ऐ दिल-ए-वहशी फ़लक कैसा
आरज़ू लखनवी
एक दिल पत्थर बने और एक दिल बन जाए मोम
आरज़ू लखनवी
यूँ दूर दूर दिल से हो हो के दिल-नशीं भी
आरज़ू लखनवी
ये दास्तान-ए-दिल है क्या हो अदा ज़बाँ से
आरज़ू लखनवी
यही इक निबाह की शक्ल है वो जफ़ा करें मैं वफ़ा करूँ
आरज़ू लखनवी
वो सर-ए-बाम कब नहीं आता
आरज़ू लखनवी
वो क्या लिखता जिसे इंकार करते भी हिजाब आया
आरज़ू लखनवी
वो बन कर बे-ज़बाँ लेने को बैठे हैं ज़बाँ मुझ से
आरज़ू लखनवी
वअ'दा सच्चा है कि झूटा मुझे मालूम न था
आरज़ू लखनवी
उस की तो एक दिल-लगी अपना बना के छोड़ दे
आरज़ू लखनवी
तुम्हें क्या काम नालों से तुम्हें क्या काम आहों से
आरज़ू लखनवी
तस्कीन-ए-दिल का ये क्या क़रीना
आरज़ू लखनवी
तक़दीर पे शाकिर रह कर भी ये कौन कहे तदबीर न कर
आरज़ू लखनवी
तलाश-ए-रंग में आवारा मिस्ल-ए-बू हूँ मैं
आरज़ू लखनवी
तड़पते दिल को न ले इज़्तिराब लेता जा
आरज़ू लखनवी
रस उन आँखों का है कहने को ज़रा सा पानी
आरज़ू लखनवी
क़ुर्बत बढ़ा बढ़ा कर बे-ख़ुद बना रहे हैं
आरज़ू लखनवी
पियूँ ही क्यूँ जो बुरा जानूँ और छुपा के पियूँ
आरज़ू लखनवी
फेर जो पड़ना था क़िस्मत में वो हस्ब-ए-मामूल पड़ा
आरज़ू लखनवी
न कोई जल्वती न कोई ख़ल्वती न कोई ख़ास था न कोई आम था
आरज़ू लखनवी
न कर तलाश-ए-असर तीर है लगा न लगा
आरज़ू लखनवी
मुझ को दिल क़िस्मत ने उस को हुस्न-ए-ग़ारत-गर दिया
आरज़ू लखनवी
मीर-ए-महफ़िल न हुए गर्मी-ए-महफ़िल तो हुए
आरज़ू लखनवी
मिरी निगाह कहाँ दीद-ए-हुस्न-ए-यार कहाँ
आरज़ू लखनवी
मिरे जोश-ए-ग़म की है अजब कहानी
आरज़ू लखनवी
मासूम नज़र का भोला-पन ललचा के लुभाना क्या जाने
आरज़ू लखनवी
कुछ मैं ने कही है न अभी उस ने सुनी है
आरज़ू लखनवी
कुछ दिन की रौनक़ बरसों का जीना
आरज़ू लखनवी
किसी गुमान-ओ-यक़ीं की हद में वो शोख़-ए-पर्दा-नशीं नहीं है
आरज़ू लखनवी