Heart Broken Poetry (page 253)

शाख़ से फूल से क्या उस का पता पूछती है

असअ'द बदायुनी

सैल-ए-गिर्या का सीने से रिश्ता बहुत

असअ'द बदायुनी

सब इक चराग़ के परवाने होना चाहते हैं

असअ'द बदायुनी

रौशनी में किस क़दर दीवार-ओ-दर अच्छे लगे

असअ'द बदायुनी

रास्ता कोई सफ़र कोई मसाफ़त कोई

असअ'द बदायुनी

मुझे भी वहशत-ए-सहरा पुकार मैं भी हूँ

असअ'द बदायुनी

मिरी अना मिरे दुश्मन को ताज़ियाना है

असअ'द बदायुनी

मिरे लोग ख़ेमा-ए-सब्र में मिरे शहर गर्द-ए-मलाल में

असअ'द बदायुनी

मौसम-ए-हिज्र तो दाइम है न रुख़्सत होगा

असअ'द बदायुनी

ख़ुशी भी अब सरापा ग़म लगे है

असअ'द बदायुनी

कहते हैं लोग शहर तो ये भी ख़ुदा का है

असअ'द बदायुनी

जो अक्स-ए-यार तह-ए-आब देख सकते हैं

असअ'द बदायुनी

जिसे न मेरी उदासी का कुछ ख़याल आया

असअ'द बदायुनी

हरीफ़ कोई नहीं दूसरा बड़ा मेरा

असअ'द बदायुनी

गाँव की आँख से बस्ती की नज़र से देखा

असअ'द बदायुनी

बिछड़ के तुझ से किसी दूसरे पे मरना है

असअ'द बदायुनी

बड़े नादान थे हम रेत को आब-ए-रवाँ समझे

असअ'द बदायुनी

अजब दिन थे कि इन आँखों में कोई ख़्वाब रहता था

असअ'द बदायुनी

अभी ज़मीन को सौदा बहुत सरों का है

असअ'द बदायुनी

वहशत हम अपनी ब'अद-ए-फ़ना छोड़ जाएँ

आरज़ू लखनवी

वफ़ा तुम से करेंगे दुख सहेंगे नाज़ उठाएँगे

आरज़ू लखनवी

शौक़ चढ़ती धूप जाता वक़्त घटती छाँव है

आरज़ू लखनवी

नज़र बचा के जो आँसू किए थे मैं ने पाक

आरज़ू लखनवी

नहीं वो अगली सी रौनक़ दयार-ए-हस्ती की

आरज़ू लखनवी

कह के ये और कुछ कहा न गया

आरज़ू लखनवी

जोश-ए-जुनूँ में वो तिरे वहशी का चीख़ना

आरज़ू लखनवी

हम को इतना भी रिहाई की ख़ुशी में नहीं होश

आरज़ू लखनवी

होश-ओ-बे-होशी की मंज़िल एक है रस्ते जुदा

आरज़ू लखनवी

हाथ से किस ने साग़र पटका मौसम की बे-कैफ़ी पर

आरज़ू लखनवी

हर टूटे हुए दिल की ढारस है तिरा वअ'दा

आरज़ू लखनवी