Heart Broken Poetry (page 252)
न आया ग़म भी मोहब्बत में साज़गार मुझे
असद भोपाली
हालात ने किसी से जुदा कर दिया मुझे
असद भोपाली
ज़िंदगी का हर नफ़स मम्नून है तदबीर का
असद भोपाली
न साथी है न मंज़िल का पता है
असद भोपाली
लब ओ रुख़्सार की क़िस्मत से दूरी
असद भोपाली
कुछ भी हो वो अब दिल से जुदा हो नहीं सकते
असद भोपाली
जब ज़िंदगी सुकून से महरूम हो गई
असद भोपाली
जब अपने पैरहन से ख़ुशबू तुम्हारी आई
असद भोपाली
इश्क़ को जब हुस्न से नज़रें मिलाना आ गया
असद भोपाली
गिराँ गुज़रने लगा दौर-ए-इंतिज़ार मुझे
असद भोपाली
ग़म-ए-हयात से जब वास्ता पड़ा होगा
असद भोपाली
दो-जहाँ से मावरा हो जाएगा
असद भोपाली
शाख़ से टूट के पत्ते ने ये दिल में सोचा
असअ'द बदायुनी
परिंद क्यूँ मिरी शाख़ों से ख़ौफ़ खाते हैं
असअ'द बदायुनी
कभी मौज-ए-ख़्वाब में खो गया कभी थक के रेत पे सो गया
असअ'द बदायुनी
जिसे पढ़ते तो याद आता था तेरा फूल सा चेहरा
असअ'द बदायुनी
जब तलक आज़ाद थे हर इक मसाफ़त थी वबाल
असअ'द बदायुनी
हवा दरख़्तों से कहती है दुख के लहजे में
असअ'द बदायुनी
ग़ैरों को क्या पड़ी है कि रुस्वा करें मुझे
असअ'द बदायुनी
ये जो शाम ज़र-निगार है
असअ'द बदायुनी
जो लोग रातों को जागते थे
असअ'द बदायुनी
हम अहल-ए-ख़ौफ़
असअ'द बदायुनी
एक नज़्म
असअ'द बदायुनी
बारिश की नज़्म
असअ'द बदायुनी
ये लोग ख़्वाब बहुत कर्बला के देखते हैं
असअ'द बदायुनी
ये धूप छाँव के असरार क्या बताते हैं
असअ'द बदायुनी
यही नहीं कि मिरा घर बदलता जाता है
असअ'द बदायुनी
वो एक नाम जो दरिया भी है किनारा भी
असअ'द बदायुनी
वक़्त इक दरिया है दरिया सब बहा ले जाएगा
असअ'द बदायुनी
उस अब्र से भी क़बाहत ज़ियादा होती है
असअ'द बदायुनी