Heart Broken Poetry (page 250)
इश्क़ है इक कैफ़-ए-पिन्हानी मगर रंजूर है
असग़र गोंडवी
हुस्न को वुसअतें जो दीं इश्क़ को हौसला दिया
असग़र गोंडवी
है दिल-ए-नाकाम-ए-आशिक़ में तुम्हारी याद भी
असग़र गोंडवी
गुम कर दिया है दीद ने यूँ सर-ब-सर मुझे
असग़र गोंडवी
अक्स किस चीज़ का आईना-ए-हैरत में नहीं
असग़र गोंडवी
आलाम-ए-रोज़गार को आसाँ बना दिया
असग़र गोंडवी
सीम-तन गुल-रुख़ों की बस्ती है
असग़र आबिद
बात बे-बात उलझते हो भला बात है क्या
असग़र आबिद
किस तरह आए तिरी बज़्म-ए-तरब में आइना
असीर लखनवी
तुम्हारी याद में दुनिया को हूँ भुलाए हुए
असर सहबाई
आह क्या क्या आरज़ूएँ नज़्र-ए-हिरमाँ हो गईं
असर सहबाई
ज़ुल्मत-ए-दश्त-ए-अदम में भी अगर जाऊँगा
असर सहबाई
तुम्हारी याद में दुनिया को हूँ भुलाए हुए
असर सहबाई
तुम्हारी फ़ुर्क़त में मेरी आँखों से ख़ूँ के आँसू टपक रहे हैं
असर सहबाई
मिरी हर साँस को सब नग़्मा-ए-महफ़िल समझते हैं
असर सहबाई
लुत्फ़ गुनाह में मिला और न मज़ा सवाब में
असर सहबाई
वो उन का हिजाब और नज़ाकत के नज़ारे
असर रामपुरी
वो जो नहीं हैं बज़्म में बज़्म की शान भी नहीं
असर रामपुरी
करम पर भी होता है धोका सितम का
असर लखनवी
भूलने वाले को शायद याद वादा आ गया
असर लखनवी
आज कुछ मेहरबान है सय्याद
असर लखनवी
आह किस से कहें कि हम क्या थे
असर लखनवी
तस्कीन-ए-दिल को अश्क-ए-अलम क्या बहाऊँ मैं
असर लखनवी
निगह-ए-शौक़ को यूँ आइना-सामानी दे
असर लखनवी
नवेद-ए-वस्ल-ए-यार आए न आए
असर लखनवी
न शरह-ए-शौक़ न तस्कीन जान-ए-ज़ार में है
असर लखनवी
मुझ को हर फूल सुनाता था फ़साना तेरा
असर लखनवी
किस तरह खिलते हैं नग़्मों के चमन समझा था मैं
असर लखनवी
झपकी ज़रा जो आँख जवानी गुज़र गई
असर लखनवी
हाए रे प्यारी प्यारी आँख
असर लखनवी