Heart Broken Poetry (page 251)
दिल इश्क़ की मय से छलक रहा है
असर लखनवी
चुपके से नाम ले के तुम्हारा कभी कभी
असर लखनवी
भूले अफ़्साने वफ़ा के याद दिल्वाते हुए
असर लखनवी
बहार है तिरे आरिज़ से लौ लगाए हुए
असर लखनवी
आप बिक जाए कोई ऐसा ख़रीदार न था
असर लखनवी
आख़िर-ए-कार यही उज़्र जफ़ा का निकला
असर लखनवी
आह से जब दिल में डूबे तीर उभारे जाएँगे
असर लखनवी
ज़िंदगी तुझ से ये गिला है मुझे
असर अकबराबादी
उल्फ़त का है मज़ा कि 'असर' ग़म भी साथ हों
असर अकबराबादी
साया भी साथ छोड़ गया अब तो ऐ 'असर'
असर अकबराबादी
हम हुए दश्त-ए-नवर्द फिर भी न देखा तुझ को
असर अकबराबादी
है अजब सी कश्मकश दिल में 'असर'
असर अकबराबादी
कोई हमदम बना के देखो तुम
असर अकबराबादी
जाने क्यूँ लोग ग़म से डरते हैं
असर अकबराबादी
सीनों में अगर होती कुछ प्यार की गुंजाइश
असद रज़ा
राहें धुआँ धुआँ हैं सफ़र गर्द गर्द है
असद रज़ा
हम से दीवानों को असरी आगही डसती रही
असद रज़ा
तमाशा है कि सब आज़ाद क़ौमें
असद मुल्तानी
इन अक़्ल के बंदों में आशुफ़्ता-सरी क्यूँ है
असद मुल्तानी
नौ मंज़िला बिल्डिंग
असद मोहम्मद ख़ाँ
हम-साई
असद जाफ़री
सिर्फ़ कहने को कोई अज़्मत-निशाँ बनता नहीं
असद जाफ़री
शश्दर-ओ-हैरान है जो भी ख़रीदारों में है
असद जाफ़री
रवाँ है क़ाफ़िला-ए-जुस्तुजू किधर मेरा
असद जाफ़री
मलाल-ए-हिज्र नहीं रंज-ए-बे-रुख़ी भी नहीं
असद जाफ़री
ख़याल यार मुझे जब लहू रुलाने लगा
असद जाफ़री
जो बज़्म-ए-दहर में कल तक थे ख़ुद-सरों की तरह
असद जाफ़री
जाऊँ कहाँ शुऊ'र-ए-हुनर किस के पास है
असद जाफ़री
जब तक वो शो'ला-रू मिरे पेश-ए-नज़र न था
असद जाफ़री
ये आँसू ढूँडता है तेरा दामन
असद भोपाली