Heart Broken Poetry (page 264)
यही होना था और हुआ जानाँ
आरिफ़ इशतियाक़
वो मेरे शहर में आया हुआ है
आरिफ़ इशतियाक़
तुम्हारी याद तारी हो रही है
आरिफ़ इशतियाक़
मुझ को फ़ुर्क़त से गुज़ारा जाएगा
आरिफ़ इशतियाक़
मैं अब उक्ता गया हूँ फुर्क़तों से
आरिफ़ इशतियाक़
हर किसी के लिए दुआ करना
आरिफ़ इशतियाक़
गिला तिरे फ़िराक़ का जो आज-कल नहीं रहा
आरिफ़ इशतियाक़
गिला होंटों पे लाए जा रहा हूँ
आरिफ़ इशतियाक़
दिल टूटा तो क्या से क्या नुक़सान हुआ
आरिफ़ इशतियाक़
आख़िरी ख़त मुझे मिला तेरा
आरिफ़ इशतियाक़
तुम्हारे हिज्र में मरना था कौन सा मुश्किल
आरिफ़ इमाम
एक पर्दा है बे-सबाती का
आरिफ़ इमाम
बना रहा हूँ अभी घर को आइना-ख़ाना
आरिफ़ इमाम
ज़ख़्म सब उस को दिखा कर रक़्स कर
आरिफ़ इमाम
उस गली से मिरे गुज़रने तक
आरिफ़ इमाम
शायरी मुझ को अजब हाल में ले जाती है
आरिफ़ इमाम
सब लहू जम गया उबाल के बीच
आरिफ़ इमाम
नफ़स की आमद-ओ-शुद को वबाल कर के भी
आरिफ़ इमाम
मुझे मुझ से मिलाती जा रही है
आरिफ़ इमाम
कुछ ऐसे ज़ख़्म-ए-ज़माना का इंदिमाल किया
आरिफ़ इमाम
फ़सील-ए-ज़ात से बाहर भी देखना है मुझे
आरिफ़ इमाम
मुझे ब-फ़ैज़-ए-तफ़क्कुर हुआ है ये इदराक
आरिफ़ फ़रहाद
ज़हराब-ए-तिश्नगी का मज़ा हम से पूछिए
आरिफ़ अंसारी
रहती है सबा जैसे ख़ुशबू के तआ'क़ुब में
आरिफ़ अंसारी
दिल क्या किसी की बात से अंदर से कट गया
आरिफ़ अंसारी
दास्ताँ भी मुख़्तलिफ़ लहजा भी यारों से जुदा
आरिफ़ अंसारी
अल्फ़ाज़ के पत्थर क्या फेंके गए पानी में
आरिफ़ अंसारी
कभी ख़याल के रिश्तों को भी टटोल के देख
आरिफ़ अब्दुल मतीन
हयूले
आरिफ़ अब्दुल मतीन
ज़मीं से ता-ब-फ़लक कोई फ़ासला भी नहीं
आरिफ़ अब्दुल मतीन