Heart Broken Poetry (page 388)

चाँदनी का रक़्स दरिया पर नहीं देखा गया

अब्दुल्लाह जावेद

अश्क ढलते नहीं देखे जाते

अब्दुल्लाह जावेद

न होवे क्यूँ के गर्दूं पे सदा दिल की बुलंद अपनी

अब्दुल वहाब यकरू

मिरा दिल मुब्तला है झाँवली का

अब्दुल वहाब यकरू

कब करे क़स्द यार आवन का

अब्दुल वहाब यकरू

इस तरह रुख़ फेरते हो सुनते ही बोसे की बात

अब्दुल वहाब यकरू

गुदाज़-ए-आतिश-ए-ग़म सीं हुई हैं बावली अँखियाँ

अब्दुल वहाब यकरू

गल को शर्मिंदा कर ऐ शोख़ गुलिस्तान में आ

अब्दुल वहाब यकरू

अगर वो गुल-बदन दरिया नहाने बे-हिजाब आवे

अब्दुल वहाब यकरू

अगर नहीं क़स्द ऐ ज़ालिम मिरे दिल के सताने का

अब्दुल वहाब यकरू

ये सानेहा भी हो गया है रस्ते में

अब्दुल वहाब सुख़न

नए हैं वस्ल के मौसम मोहब्बतें भी नई

अब्दुल वहाब सुख़न

मुझे एहसास ये पल पल रहा है

अब्दुल वहाब सुख़न

महक रहा है तसव्वुर में ख़्वाब की सूरत

अब्दुल वहाब सुख़न

हमें नसीब कोई दीदा-वर नहीं होता

अब्दुल वहाब सुख़न

ऐ मेरी आँखो ये बे-सूद जुस्तुजू कैसी

अब्दुल वहाब सुख़न

शेर कहने की तबीअत न रही

अब्दुल सलाम

आग सीनों में जला कर रखिए

अब्दुल सलाम

यूँ अश्क बरसते हैं मिरे दीदा-ए-तर से

अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची

क्या क्या सुपुर्द-ए-ख़ाक हुए नामवर तमाम

अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची

कोई नज़्र-ए-ग़म-ए-हालात न होने पाए

अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची

करते नहीं जफ़ा भी वो तर्क-ए-वफ़ा के साथ

अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची

जीत कर बाज़ी-ए-उल्फ़त को भी हारा जाए

अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची

ग़म से घबरा के कभी नाला-ओ-फ़रियाद न कर

अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची

दिल उन की मोहब्बत का जो दीवाना लगे है

अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची

अदब में मुद्दई-ए-फ़न तो बे-शुमार मिले

अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची

याद तो हक़ की तुझे याद है पर याद रहे

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

न पाया गाह क़ाबू आह में ने हाथ जब डाला

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

क्यूँ तू रोता है दिला आने दे रोज़-ए-वस्ल को

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

गले से लगते ही जितने गिले थे भूल गए

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी