Heart Broken Poetry (page 390)
हिज्र में गुज़री है उस रात की बातें न करो
अब्दुल मतीन नियाज़
ग़म-ए-हयात ग़म-ए-दिल निशात-ए-जाँ गुज़रा
अब्दुल मतीन नियाज़
अपने वहम-ओ-गुमान से निकला
अब्दुल मतीन नियाज़
ज़लज़ले सख़्त आते रहे रात-भर
अब्दुल मन्नान तरज़ी
सुब्ह सफ़र और शाम सफ़र
अब्दुल मन्नान तरज़ी
पुर्सिश है चश्म-ए-अश्क-फ़शाँ पर न आए हर्फ़
अब्दुल मन्नान तरज़ी
पा के तूफ़ाँ का इशारा दरिया
अब्दुल मन्नान तरज़ी
मुद्दआ'-ओ-आरज़ू शौक़-ए-तमन्ना आप हैं
अब्दुल मन्नान तरज़ी
मिरी निगाह को जल्वों का हौसला दे दो
अब्दुल मन्नान तरज़ी
मेरी आँखों में आँसू प्यारे
अब्दुल मन्नान तरज़ी
मर जाएँगे पिंदार का सौदा न करेंगे
अब्दुल मन्नान तरज़ी
मैं पहुँचा अपनी मंज़िल तक मगर आहिस्ता आहिस्ता
अब्दुल मन्नान तरज़ी
क्या यहाँ देखिए क्या वहाँ देखिए
अब्दुल मन्नान तरज़ी
ख़ून जब अश्क में ढलता है ग़ज़ल होती है
अब्दुल मन्नान तरज़ी
खुली जब आँख तो देखा कि था बाज़ार का हल्क़ा
अब्दुल मन्नान तरज़ी
जब निगाह-ए-तलब मो'तबर हो गई
अब्दुल मन्नान तरज़ी
जब भी गुलशन में चली ठंडी हवा
अब्दुल मन्नान तरज़ी
हर आन नई शान है हर लम्हा नया है
अब्दुल मन्नान तरज़ी
नज़र की वुसअतों में कुल जहाँ था
अब्दुल मन्नान समदी
दोस्तो ज़िंदगी अमानत है
अब्दुल मन्नान समदी
बज़्म में वो बैठता है जब भी आगे सामने
अब्दुल मन्नान समदी
बदलते मौसमों में आब-ओ-दाना भी नहीं होगा
अब्दुल मन्नान समदी
वक़्त अब सर पे वो आया है कि सर याद नहीं
अब्दुल मलिक सोज़
तू जो आबाद है ऐ दोस्त मिरे दिल के क़रीब
अब्दुल मलिक सोज़
मुन्कशिफ़ तल्ख़ी-ए-हालात न होने पाई
अब्दुल मलिक सोज़
कुछ हसीं यादें भी हैं दीदा-ए-नम के साथ साथ
अब्दुल मलिक सोज़
दिल ग़म-ए-इश्क़ के इज़हार से कतराता है
अब्दुल मलिक सोज़
दिल अपना याद-ए-यार से बेगाना तो नहीं
अब्दुल मलिक सोज़
तुझे कुछ इश्क़ ओ उल्फ़त के सिवा भी याद है ऐ दिल
अब्दुल मजीद सालिक
हाल-ए-दिल सुन के वो आज़ुर्दा हैं शायद उन को
अब्दुल मजीद सालिक