Heart Broken Poetry (page 391)
हाल-ए-दिल सुन के वो आज़ुर्दा हैं शायद उन को
अब्दुल मजीद सालिक
वो है हैरत-फ़ज़ा-ए-चश्म-ए-मा'नी सब नज़ारों में
अब्दुल मजीद सालिक
न मोहतसिब की न हूर-ओ-जिनाँ की बात करो
अब्दुल मजीद सालिक
मिरे दिल में है कि पूछूँ कभी मुर्शिद-ए-मुग़ाँ से
अब्दुल मजीद सालिक
ख़िरद में मुब्तिला है 'सालिक' दीवाना बरसों से
अब्दुल मजीद सालिक
जो मुश्त-ए-ख़ाक हो उस ख़ाक-दाँ की बात करो
अब्दुल मजीद सालिक
हम-नफ़सो उजड़ गईं मेहर-ओ-वफ़ा की बस्तियाँ
अब्दुल मजीद सालिक
ग़म के हाथों मिरे दिल पर जो समाँ गुज़रा है
अब्दुल मजीद सालिक
कहाँ शिकवा ज़माने का पस-ए-दीवार करते हैं
अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद
जब कोई मेहरबान होता है
अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद
जाना कहाँ है और कहाँ जा रहे हैं हम
अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद
बेवफ़ा कहिए बा-वफ़ा कहिए
अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद
अब चराग़ों में ज़िंदगी कम है
अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद
मुद्दतों देख लिया चुप रह के
अब्दुल मजीद हैरत
शाम-ए-ग़म और सितारों के सिवा
अब्दुल मजीद भट्टी
ज़रा इक तबस्सुम की तकलीफ़ करना
अब्दुल हमीद अदम
वही शय मक़सद-ए-क़ल्ब-ओ-नज़र महसूस होती है
अब्दुल हमीद अदम
तकलीफ़ मिट गई मगर एहसास रह गया
अब्दुल हमीद अदम
तड़प कर मैं ने तौबा तोड़ डाली
अब्दुल हमीद अदम
तबाह हो के हक़ाएक़ के खुरदुरे-पन से
अब्दुल हमीद अदम
साक़ी तुझे इक थोड़ी सी तकलीफ़ तो होगी
अब्दुल हमीद अदम
मुझे तौबा का पूरा अज्र मिलता है उसी साअत
अब्दुल हमीद अदम
मैं मय-कदे की राह से हो कर निकल गया
अब्दुल हमीद अदम
मैं बद-नसीब हूँ मुझ को न दे ख़ुशी इतनी
अब्दुल हमीद अदम
लोग कहते हैं कि तुम से ही मोहब्बत है मुझे
अब्दुल हमीद अदम
किसी जानिब से कोई मह-जबीं आने ही वाला है
अब्दुल हमीद अदम
कश्ती चला रहा है मगर किस अदा के साथ
अब्दुल हमीद अदम
जो अक्सर बार-वर होने से पहले टूट जाते थे
अब्दुल हमीद अदम
जिस से छुपना चाहता हूँ मैं 'अदम'
अब्दुल हमीद अदम
जिन से इंसाँ को पहुँचती है हमेशा तकलीफ़
अब्दुल हमीद अदम