Heart Broken Poetry (page 393)
हर परी-वश को ख़ुदा तस्लीम कर लेता हूँ मैं
अब्दुल हमीद अदम
हँस हँस के जाम जाम को छलका के पी गया
अब्दुल हमीद अदम
गुनाह-ए-जुरअत-ए-तदबीर कर रहा हूँ मैं
अब्दुल हमीद अदम
गो तिरी ज़ुल्फ़ों का ज़िंदानी हूँ मैं
अब्दुल हमीद अदम
फ़क़ीर किस दर्जा शादमाँ थे हुज़ूर को कुछ तो याद होगा
अब्दुल हमीद अदम
एक ना-मक़बूल क़ुर्बानी हूँ मैं
अब्दुल हमीद अदम
दिल है बड़ी ख़ुशी से इसे पाएमाल कर
अब्दुल हमीद अदम
दिल डूब न जाएँ प्यासों के तकलीफ़ ज़रा फ़रमा देना
अब्दुल हमीद अदम
भूली-बिसरी बातों से क्या तश्कील-ए-रूदाद करें
अब्दुल हमीद अदम
भूले से कभी ले जो कोई नाम हमारा
अब्दुल हमीद अदम
बे-सबब क्यूँ तबाह होता है
अब्दुल हमीद अदम
बस इस क़दर है ख़ुलासा मिरी कहानी का
अब्दुल हमीद अदम
बहुत से लोगों को ग़म ने जिला के मार दिया
अब्दुल हमीद अदम
अगरचे रोज़-ए-अज़ल भी यही अँधेरा था
अब्दुल हमीद अदम
आप की आँख अगर आज गुलाबी होगी
अब्दुल हमीद अदम
आँखों से तिरी ज़ुल्फ़ का साया नहीं जाता
अब्दुल हमीद अदम
आज फिर रूह में इक बर्क़ सी लहराती है
अब्दुल हमीद अदम
आगही में इक ख़ला मौजूद है
अब्दुल हमीद अदम
ज़वाल-ए-जिस्म को देखो तो कुछ एहसास हो इस का
अब्दुल हमीद
ये क़ैद है तो रिहाई भी अब ज़रूरी है
अब्दुल हमीद
पाँव रुकते ही नहीं ज़ेहन ठहरता ही नहीं
अब्दुल हमीद
लौट गए सब सोच के घर में कोई नहीं है
अब्दुल हमीद
फ़लक पर उड़ते जाते बादलों को देखता हूँ मैं
अब्दुल हमीद
एक मिश्अल थी बुझा दी उस ने
अब्दुल हमीद
दम-ब-दम मुझ पे चला कर तलवार
अब्दुल हमीद
बरसते थे बादल धुआँ फैलता था अजब चार जानिब
अब्दुल हमीद
उसे देख कर अपना महबूब प्यारा बहुत याद आया
अब्दुल हमीद
साए फैल गए खेतों पर कैसा मौसम होने लगा
अब्दुल हमीद
पाँव रुकते ही नहीं ज़ेहन ठहरता ही नहीं
अब्दुल हमीद
कुछ अपना पता दे कर हैरान बहुत रक्खा
अब्दुल हमीद