Heart Broken Poetry (page 394)

कितनी महबूब थी ज़िंदगी कुछ नहीं कुछ नहीं

अब्दुल हमीद

किसी का क़हर किसी की दुआ मिले तो सही

अब्दुल हमीद

किसी दश्त ओ दर से गुज़रना भी क्या

अब्दुल हमीद

कभी देखो तो मौजों का तड़पना कैसा लगता है

अब्दुल हमीद

एक मिश्अल थी बुझा दी उस ने

अब्दुल हमीद

एक ख़ुदा पर तकिया कर के बैठ गए हैं

अब्दुल हमीद

दिल में जो बात है बताते नहीं

अब्दुल हमीद

लहू की बूँद मिस्ल-ए-आइना हर दर पे रक्खी थी

अब्दुल हमीद साक़ी

इस से पहले कि हमें अहल-ए-जफ़ा रुस्वा करें

अब्दुल हमीद साक़ी

क्या सहल समझे हो कहीं धब्बा छुटा न हो

अब्दुल हलीम शरर

क्या सहल समझे हो कहीं धब्बा छुटा न हो

अब्दुल हलीम शरर

ये हाथ राख में ख़्वाबों की डालते तो हो

अब्दुल हफ़ीज़ नईमी

सदा किसे दें 'नईमी' किसे दिखाएँ ज़ख़्म

अब्दुल हफ़ीज़ नईमी

मिरे ख़्वाबों की चिकनी सीढ़ियों पर

अब्दुल हफ़ीज़ नईमी

खड़ा हुआ हूँ सर-ए-राह मुंतज़िर कब से

अब्दुल हफ़ीज़ नईमी

इस तिलिस्म-ए-रोज़-ओ-शब से तो कभी निकलो ज़रा

अब्दुल हफ़ीज़ नईमी

होंकते दश्त में इक ग़म का समुंदर देखो

अब्दुल हफ़ीज़ नईमी

हर इंसाँ अपने होने की सज़ा है

अब्दुल हफ़ीज़ नईमी

ग़ुबार-ए-दर्द से सारा बदन अटा निकला

अब्दुल हफ़ीज़ नईमी

गर्द-ए-फ़िराक़ ग़ाज़ा कश-ए-आइना न हो

अब्दुल हफ़ीज़ नईमी

दुआ को हाथ मिरा जब कभी उठा होगा

अब्दुल हफ़ीज़ नईमी

बहार बन के ख़िज़ाँ को न यूँ दिलासा दे

अब्दुल हफ़ीज़ नईमी

फिर रग-शो'ला-ए-जाँ-सोज़ में नश्तर गुज़रा

अब्दुल हादी वफ़ा

ज़ाहिरन मौत है क़ज़ा है इश्क़

अब्दुल ग़फ़ूर नस्साख़

पीरी में शौक़ हौसला-फ़रसा नहीं रहा

अब्दुल ग़फ़ूर नस्साख़

नक़्श-ए-दिल है सितम जुदाई का

अब्दुल ग़फ़ूर नस्साख़

ज़मीं-नज़ाद हैं लेकिन ज़माँ में रहते हैं

अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद

ताकीद करो ज़मज़मा-संजान-ए-चमन को

अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद

क़ुर्ब नस नस में आग भरता है

अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद

क़ज़ा से क़र्ज़ किस मुश्किल से ली उम्र-ए-बक़ा हम ने

अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद