Heart Broken Poetry (page 396)

बे-निशाँ होने से पहले

अब्दुल अहद साज़

अलविदा

अब्दुल अहद साज़

आवाज़ के मोती

अब्दुल अहद साज़

ज़िक्र हम से बे-तलब का क्या तलबगारी के दिन

अब्दुल अहद साज़

यूँ तो सौ तरह की मुश्किल सुख़नी आए हमें

अब्दुल अहद साज़

यूँ भी दिल अहबाब के हम ने गाहे गाहे रक्खे थे

अब्दुल अहद साज़

तब-ए-हस्सास मिरी ख़ार हुई जाती है

अब्दुल अहद साज़

सवाल का जवाब था जवाब के सवाल में

अब्दुल अहद साज़

सबक़ उम्र का या ज़माने का है

अब्दुल अहद साज़

नज़र आसूदा-काम-ए-रौशनी है

अब्दुल अहद साज़

न मक़ामात न तरतीब-ए-ज़मानी अपनी

अब्दुल अहद साज़

मिज़ाज-ए-सहल-तलब अपना रुख़्सतें माँगे

अब्दुल अहद साज़

मिरी निगाहों पे जिस ने शाम ओ सहर की रानाइयाँ लिखी हैं

अब्दुल अहद साज़

मरने की पुख़्ता-ख़याली में जीने की ख़ामी रहने दो

अब्दुल अहद साज़

मंज़र शमशान हो गया है

अब्दुल अहद साज़

लम्हा-ए-तख़्लीक़ बख़्शा उस ने मुझ को भीक में

अब्दुल अहद साज़

लफ़्ज़ों के सहरा में क्या मा'नी के सराब दिखाना भी

अब्दुल अहद साज़

लफ़्ज़ का दरिया उतरा दश्त-ए-मआनी फैला

अब्दुल अहद साज़

खुली जब आँख तो देखा कि दुनिया सर पे रक्खी है

अब्दुल अहद साज़

खिले हैं फूल की सूरत तिरे विसाल के दिन

अब्दुल अहद साज़

कभी नुमायाँ कभी तह-नशीं भी रहते हैं

अब्दुल अहद साज़

जो कुछ भी ये जहाँ की ज़माने की घर की है

अब्दुल अहद साज़

जीतने मारका-ए-दिल वो लगातार गया

अब्दुल अहद साज़

जब तक शब्द के दीप जलेंगे सब आएँगे तब तक यार

अब्दुल अहद साज़

जाने क़लम की आँख में किस का ज़ुहूर था

अब्दुल अहद साज़

हिसार-ए-दीद में जागा तिलिस्म-ए-बीनाई

अब्दुल अहद साज़

हसरत-ए-दीद नहीं ज़ौक़-ए-तमाशा भी नहीं

अब्दुल अहद साज़

हद-ए-उफ़ुक़ पर सारा कुछ वीरान उभरता आता है

अब्दुल अहद साज़

घुल सी गई रूह में उदासी

अब्दुल अहद साज़

दूर से शहर-ए-फ़िक्र सुहाना लगता है

अब्दुल अहद साज़