Heart Broken Poetry (page 397)

दिखाई देने के और दिखाई न देने के दरमियान सा कुछ

अब्दुल अहद साज़

बुझ गई आग तो कमरे में धुआँ ही रखना

अब्दुल अहद साज़

बे-मसरफ़ बे-हासिल दुख

अब्दुल अहद साज़

बजा कि पाबंद-ए-कूचा-ए-नाज़ हम हुए थे

अब्दुल अहद साज़

बहुत मलूल बड़े शादमाँ गए हुए हैं

अब्दुल अहद साज़

अज़दवाजी ज़िंदगी भी और तिजारत भी अदब भी

अब्दुल अहद साज़

आज फिर शब का हवाला तिरी जानिब ठहरे

अब्दुल अहद साज़

ये मोहब्बत की कहानी नहीं मरती लेकिन

अब्बास ताबिश

ये मौज मौज बनी किस की शक्ल सी 'ताबिश'

अब्बास ताबिश

वर्ना कोई कब गालियाँ देता है किसी को

अब्बास ताबिश

तिलिस्म-ए-ख़्वाब से मेरा बदन पत्थर नहीं होता

अब्बास ताबिश

तेरी रूह में सन्नाटा है और मिरी आवाज़ में चुप

अब्बास ताबिश

सुन रहा हूँ अभी तक मैं अपनी ही आवाज़ की बाज़गश्त

अब्बास ताबिश

शब की शब कोई न शर्मिंदा-ए-रुख़स्त ठहरे

अब्बास ताबिश

रात को जब याद आए तेरी ख़ुशबू-ए-क़बा

अब्बास ताबिश

रात कमरे में न था मेरे अलावा कोई

अब्बास ताबिश

मोहब्बत एक दम दुख का मुदावा कर नहीं देती

अब्बास ताबिश

मेरे सीने से ज़रा कान लगा कर देखो

अब्बास ताबिश

मेरा रंज-ए-मुस्तक़िल भी जैसे कम सा हो गया

अब्बास ताबिश

मकीं जब नींद के साए में सुस्ताने लगें 'ताबिश'

अब्बास ताबिश

मैं अपने आप में गहरा उतर गया शायद

अब्बास ताबिश

इल्तिजाएँ कर के माँगी थी मोहब्बत की कसक

अब्बास ताबिश

हम हैं सूखे हुए तालाब पे बैठे हुए हंस

अब्बास ताबिश

हिज्र को हौसला और वस्ल को फ़ुर्सत दरकार

अब्बास ताबिश

घर पहुँचता है कोई और हमारे जैसा

अब्बास ताबिश

फ़क़त माल-ओ-ज़र-ए-दीवार-ओ-दर अच्छा नहीं लगता

अब्बास ताबिश

एक मुद्दत से मिरी माँ नहीं सोई 'ताबिश'

अब्बास ताबिश

बस एक मोड़ मिरी ज़िंदगी में आया था

अब्बास ताबिश

वो हँसती है तो उस के हाथ रोते हैं

अब्बास ताबिश

उसे मैं ने नहीं देखा

अब्बास ताबिश