Heart Broken Poetry (page 398)
परों में शाम ढलती है
अब्बास ताबिश
पागल
अब्बास ताबिश
अँदेशा-ए-विसाल की एक नज़्म
अब्बास ताबिश
अधूरी नज़्म
अब्बास ताबिश
अभी उस की ज़रूरत थी
अब्बास ताबिश
यूँ तो शीराज़ा-ए-जाँ कर के बहम उठते हैं
अब्बास ताबिश
ये वाहिमे भी अजब बाम-ओ-दर बनाते हैं
अब्बास ताबिश
ये तो नहीं फ़रहाद से यारी नहीं रखते
अब्बास ताबिश
ये किस के ख़ौफ़ का गलियों में ज़हर फैल गया
अब्बास ताबिश
ये हम को कौन सी दुनिया की धुन आवारा रखती है
अब्बास ताबिश
ये हम जो हिज्र में उस का ख़याल बाँधते हैं
अब्बास ताबिश
ये हम जो हिज्र में उस का ख़याल बाँधते हैं
अब्बास ताबिश
ये देख मिरे नक़्श-ए-कफ़-ए-पा मिरे आगे
अब्बास ताबिश
ये अजब साअत-ए-रुख़्सत है कि डर लगता है
अब्बास ताबिश
याद कर कर के उसे वक़्त गुज़ारा जाए
अब्बास ताबिश
वो चाँद हो कि चाँद सा चेहरा कोई तो हो
अब्बास ताबिश
वो आने वाला नहीं फिर भी आना चाहता है
अब्बास ताबिश
उस का ख़याल ख़्वाब के दर से निकल गया
अब्बास ताबिश
टूट जाने में खिलौनों की तरह होता है
अब्बास ताबिश
तिलिस्म-ए-ख़्वाब से मेरा बदन पत्थर नहीं होता
अब्बास ताबिश
तेरी रूह में सन्नाटा है और मिरी आवाज़ में चुप
अब्बास ताबिश
तेरी आँखों से अपनी तरफ़ देखना भी अकारत गया
अब्बास ताबिश
तेरे लिए सब छोड़ के तेरा न रहा मैं
अब्बास ताबिश
सुब्ह की पहली किरन पहली नज़र से पहले
अब्बास ताबिश
शिकस्ता-ख़्वाब-ओ-शिकस्ता-पा हूँ मुझे दुआओं में याद रखना
अब्बास ताबिश
शे'र लिखने का फ़ाएदा क्या है
अब्बास ताबिश
शायद किसी बला का था साया दरख़्त पर
अब्बास ताबिश
शाख़ पर फूल फ़लक पर कोई तारा भी नहीं
अब्बास ताबिश
शजर समझ के मिरा एहतिराम करते हैं
अब्बास ताबिश
साँस के हम-राह शो'ले की लपक आने को है
अब्बास ताबिश