Heart Broken Poetry (page 386)

जफ़ा के ज़िक्र पे वो बद-हवास कैसा है

अब्दुस्समद ’तपिश’

गरचे नेज़ों पे सर है

अब्दुस्समद ’तपिश’

एक भी चैन का बिस्तर नहीं होने देता

अब्दुस्समद ’तपिश’

देख कर मेरी अना किस दर्जा हैरानी में है

अब्दुस्समद ’तपिश’

आँख थी सूजी हुई और रात भर सोया न था

अब्दुस्समद ’तपिश’

हक़ मिरा मुझ को मिरे यार नहीं देते हैं

अब्दुश्शुकूर आसी

ये कौन मेरे अलावा मिरे वजूद में है

अब्दुर्राहमान वासिफ़

रोज़ वहशत कोई नई मिरे दोस्त

अब्दुर्राहमान वासिफ़

मेज़ क़लम क़िर्तास दरीचा सन्नाटा

अब्दुर्राहमान वासिफ़

मज़ीद कुछ नहीं बोला मैं हो गया ख़ामोश

अब्दुर्राहमान वासिफ़

फ़रेब-ए-ज़ार मोहब्बत-नगर खुला हुआ है

अब्दुर्राहमान वासिफ़

दिल में लिए औहाम को इस घर से उठा मैं

अब्दुर्राहमान वासिफ़

अगर तुम रोक दो इज़हार-ए-लाचारी करूँगा

अब्दुर्राहमान वासिफ़

ज़ुल्मतें वहशत-ए-फ़र्दा से निढाल

अब्दुर रऊफ़ उरूज

कुछ न किया अरबाब-ए-जुनूँ ने फिर भी इतना काम किया

अब्दुर रऊफ़ उरूज

ख़मोशी मेरी लय में गुनगुनाना चाहती है

अब्दुर रऊफ़ उरूज

जादा-ए-मय पे गुज़र ख़्वाबों का

अब्दुर रऊफ़ उरूज

आज यादों ने अजब रंग बिखेरे दिल में

अब्दुर रऊफ़ उरूज

लाहौर के नाम

अब्दुर्रशीद

चुप

अब्दुर्रशीद

पत्थर ने पुकारा था मैं आवाज़ की धुन में

अब्दुर्रहीम नश्तर

मैं भी तालाब का ठहरा हुआ पानी था कभी

अब्दुर्रहीम नश्तर

वो सो रहा है ख़ुदा दूर आसमानों में

अब्दुर्रहीम नश्तर

वो शख़्स जिस ने ख़ुद अपना लहू पिया होगा

अब्दुर्रहीम नश्तर

टूट कर देर तलक प्यार किया है मुझ को

अब्दुर्रहीम नश्तर

सफ़ेद-पोश दरिंदों ने गुल खिलाए थे

अब्दुर्रहीम नश्तर

फिर इक नए सफ़र पे चला हूँ मकान से

अब्दुर्रहीम नश्तर

पंछियों के रू-ब-रू क्या ज़िक्र-ए-नादारी करूँ

अब्दुर्रहीम नश्तर

मैं तेरी चाह में झूटा हवस में सच्चा हूँ

अब्दुर्रहीम नश्तर

दश्त-ए-अफ़्कार में सूखे हुए फूलों से मिले

अब्दुर्रहीम नश्तर