Hope Poetry (page 38)
उस को आज़ादी न मिलने का हमें मक़्दूर है
हफ़ीज़ जौनपुरी
शिकवा करते हैं ज़बाँ से न गिला करते हैं
हफ़ीज़ जौनपुरी
शब-ए-वस्ल है बहस हुज्जत अबस
हफ़ीज़ जौनपुरी
साथ रहते इतनी मुद्दत हो गई
हफ़ीज़ जौनपुरी
सदमे जो कुछ हों दिल पे सहिए
हफ़ीज़ जौनपुरी
न आ जाए किसी पर दिल किसी का
हफ़ीज़ जौनपुरी
मुँह मिरा एक एक तकता था
हफ़ीज़ जौनपुरी
लिख दे आमिल कोई ऐसा ता'वीज़
हफ़ीज़ जौनपुरी
किसी को देख कर बे-ख़ुद दिल-ए-काम हो जाना
हफ़ीज़ जौनपुरी
ख़ुद-ब-ख़ुद आँख बदल कर ये सवाल अच्छा है
हफ़ीज़ जौनपुरी
ख़ुद-बख़ुद आँख बदल कर ये सवाल अच्छा है
हफ़ीज़ जौनपुरी
ख़राब-ओ-ख़स्ता हुए ख़ाक में शबाब मिला
हफ़ीज़ जौनपुरी
कहा ये किस ने कि वादे का ए'तिबार न था
हफ़ीज़ जौनपुरी
जुनूँ के जोश में फिरते हैं मारे मारे अब
हफ़ीज़ जौनपुरी
इसी ख़याल से तर्क उन की चाह कर न सके
हफ़ीज़ जौनपुरी
'हफ़ीज़' वस्ल में कुछ हिज्र का ख़याल न था
हफ़ीज़ जौनपुरी
हाए अब कौन लगी दिल की बुझाने आए
हफ़ीज़ जौनपुरी
दुनिया में यूँ तो हर कोई अपनी सी कर गया
हफ़ीज़ जौनपुरी
दिया जब जाम-ए-मय साक़ी ने भर के
हफ़ीज़ जौनपुरी
दिल में हैं वस्ल के अरमान बहुत
हफ़ीज़ जौनपुरी
दिल को इसी सबब से है इज़्तिराब शायद
हफ़ीज़ जौनपुरी
दिल इस लिए है दोस्त कि दिल में है जा-ए-दोस्त
हफ़ीज़ जौनपुरी
दिल है तो तिरे वस्ल के अरमान बहुत हैं
हफ़ीज़ जौनपुरी
चाक-ए-दामाँ न रहा चाक-ए-गरेबाँ न रहा
हफ़ीज़ जौनपुरी
बताऊँ क्या किसी को मैं कि तुम क्या चीज़ हो क्या हो
हफ़ीज़ जौनपुरी
बैठ जाता हूँ जहाँ छाँव घनी होती है
हफ़ीज़ जौनपुरी
अजब ज़माने की गर्दिशें हैं ख़ुदा ही बस याद आ रहा है
हफ़ीज़ जौनपुरी
अफ़्सुर्दगी-ए-दिल से ये रंग है सुख़न में
हफ़ीज़ जौनपुरी
अब तो नहीं आसरा किसी का
हफ़ीज़ जौनपुरी
आप ही से न जब रहा मतलब
हफ़ीज़ जौनपुरी