Hope Poetry (page 40)
मस्तों पे उँगलियाँ न उठाओ बहार में
हफ़ीज़ जालंधरी
मजाज़ ऐन-ए-हक़ीक़त है बा-सफ़ा के लिए
हफ़ीज़ जालंधरी
क्यूँ हिज्र के शिकवे करता है क्यूँ दर्द के रोने रोता है
हफ़ीज़ जालंधरी
कोई दवा न दे सके मशवरा-ए-दुआ दिया
हफ़ीज़ जालंधरी
कोई चारा नहीं दुआ के सिवा
हफ़ीज़ जालंधरी
किसी के रू-ब-रू बैठा रहा मैं बे-ज़बाँ हो कर
हफ़ीज़ जालंधरी
जवानी के तराने गा रहा हूँ
हफ़ीज़ जालंधरी
जल्वा-ए-हुस्न को महरूम-ए-तमाशाई कर
हफ़ीज़ जालंधरी
इश्क़ ने हुस्न की बे-दाद पे रोना चाहा
हफ़ीज़ जालंधरी
इश्क़ ने अक़्ल को दीवाना बना रक्खा है
हफ़ीज़ जालंधरी
इश्क़ में छेड़ हुई दीदा-ए-तर से पहले
हफ़ीज़ जालंधरी
इश्क़ के हाथों ये सारी आलम-आराई हुई
हफ़ीज़ जालंधरी
इन गेसुओं में शाना-ए-अरमाँ न कीजिए
हफ़ीज़ जालंधरी
दिल-ए-बे-मुद्दआ है और मैं हूँ
हफ़ीज़ जालंधरी
दिल से तिरा ख़याल न जाए तो क्या करूँ
हफ़ीज़ जालंधरी
दिल को वीराना कहोगे मुझे मालूम न था
हफ़ीज़ जालंधरी
चले थे हम कि सैर-ए-गुलशन-ए-ईजाद करते हैं
हफ़ीज़ जालंधरी
बे-तअल्लुक़ ज़िंदगी अच्छी नहीं
हफ़ीज़ जालंधरी
ऐ दोस्त मिट गया हूँ फ़ना हो गया हूँ मैं
हफ़ीज़ जालंधरी
अगर मौज है बीच धारे चला चल
हफ़ीज़ जालंधरी
अब तो कुछ और भी अंधेरा है
हफ़ीज़ जालंधरी
आने वाले जाने वाले हर ज़माने के लिए
हफ़ीज़ जालंधरी
आख़िर एक दिन शाद करोगे
हफ़ीज़ जालंधरी
तमाम उम्र किया हम ने इंतिज़ार-ए-बहार
हफ़ीज़ होशियारपुरी
आज की रात
हफ़ीज़ होशियारपुरी
रौशनी सी कभी कभी दिल में
हफ़ीज़ होशियारपुरी
राज़-ए-सर-बस्ता मोहब्बत के ज़बाँ तक पहुँचे
हफ़ीज़ होशियारपुरी
न पूछ क्यूँ मिरी आँखों में आ गए आँसू
हफ़ीज़ होशियारपुरी
कुछ इस तरह से नज़र से गुज़र गया कोई
हफ़ीज़ होशियारपुरी
कुछ इस तरह से नज़र से गुज़र गया कोई
हफ़ीज़ होशियारपुरी