Hope Poetry (page 39)
आग़ाज़-ए-मोहब्बत में बरसों यूँ ज़ब्त से हम ने काम लिया
हफ़ीज़ जौनपुरी
आग़ाज़-ए-मोहब्बत में बरसों यूँ ज़ब्त से हम ने काम लिया
हफ़ीज़ जौनपुरी
तन्हाई-ए-फ़िराक़ में उम्मीद बार-हा
हफ़ीज़ जालंधरी
क्यूँ हिज्र के शिकवे करता है क्यूँ दर्द के रोने रोता है
हफ़ीज़ जालंधरी
कोई दवा न दे सके मशवरा-ए-दुआ दिया
हफ़ीज़ जालंधरी
कोई चारा नहीं दुआ के सिवा
हफ़ीज़ जालंधरी
हाए कोई दवा करो हाए कोई दुआ करो
हफ़ीज़ जालंधरी
चराग़-ए-ख़ाना-ए-दर्वेश हों मैं
हफ़ीज़ जालंधरी
तौबा-नामा
हफ़ीज़ जालंधरी
रक़्क़ासा
हफ़ीज़ जालंधरी
मेरी शाएरी
हफ़ीज़ जालंधरी
कृष्ण कन्हैया
हफ़ीज़ जालंधरी
फ़ुर्सत की तमन्ना में
हफ़ीज़ जालंधरी
अभी तो मैं जवान हूँ
हफ़ीज़ जालंधरी
अब ख़ूब हँसेगा दीवाना
हफ़ीज़ जालंधरी
ज़िंदगी का लुत्फ़ भी आ जाएगा
हफ़ीज़ जालंधरी
ये क्या मक़ाम है वो नज़ारे कहाँ गए
हफ़ीज़ जालंधरी
ये और दौर है अब और कुछ न फ़रमाए
हफ़ीज़ जालंधरी
वो क़ाफ़िला आराम-तलब हो भी तो क्या हो
हफ़ीज़ जालंधरी
वो अब्र जो मय-ख़्वार की तुर्बत पे न बरसे
हफ़ीज़ जालंधरी
उठो अब देर होती है वहाँ चल कर सँवर जाना
हफ़ीज़ जालंधरी
उन को जिगर की जुस्तुजू उन की नज़र को क्या करूँ
हफ़ीज़ जालंधरी
उभरे जो ख़ाक से वो तह-ए-ख़ाक हो गए
हफ़ीज़ जालंधरी
तीर चिल्ले पे न आना कि ख़ता हो जाना
हफ़ीज़ जालंधरी
तिरे दिल में भी हैं कुदूरतें तिरे लब पे भी हैं शिकायतें
हफ़ीज़ जालंधरी
शैख़ का ख़ौफ़ हमें हश्र का धड़का हम को
हफ़ीज़ जालंधरी
निगाह-ए-आरज़ू-आमोज़ का चर्चा न हो जाए
हफ़ीज़ जालंधरी
मिल जाए मय तो सज्दा-ए-शुकराना चाहिए
हफ़ीज़ जालंधरी
मज़हका आओ उड़ाएँ इश्क़-ए-बे-बुनियाद का
हफ़ीज़ जालंधरी
मौत के चेहरे पे है क्यूँ मुर्दनी छाई हुई
हफ़ीज़ जालंधरी