Hope Poetry (page 60)
सुब्हों जैसे लोग
गीताञ्जलि राय
एक आम वाक़िआ'
गीताञ्जलि राय
ज़िंदगी से उम्र-भर तक चलने का वादा किया
गौतम राजऋषि
कि इस से पहले ख़िज़ाँ का शिकार हो जाऊँ
गौतम राजऋषि
ये सहरा-ए-तलब या बेशा-ए-आशुफ़्ता-हाली है
गौहर होशियारपुरी
यहाँ कौन इस के सिवा रह गया
गौहर होशियारपुरी
उजले मैले पेश हुए
गौहर होशियारपुरी
मैं ख़ुद ही ख़ूगर-ए-ख़लिश-ए-जुस्तुजू न था
गौहर होशियारपुरी
हाँ काहिश-ए-फ़ुज़ूल का हासिल भी कुछ नहीं
गौहर होशियारपुरी
इक साया-ए-शाम याद आया
गौहर होशियारपुरी
दिल तमाम आईने तीरा कौन रौशन कौन
गौहर होशियारपुरी
दिल सिलसिला-ए-शौक़ की तश्हीर भी चाहे
गौहर होशियारपुरी
आइए ऐ जान-ए-आलम आइए
गौहर बेगम गौहर
साँसों की जल-तरंग पर नग़्मा-ए-इश्क़ गाए जा
गणेश बिहारी तर्ज़
रह-ए-इश्क़ में ग़म-ए-ज़िंदगी की भी ज़िंदगी सफ़री रही
गणेश बिहारी तर्ज़
माहौल साज़गार करो मैं नशे में हूँ
गणेश बिहारी तर्ज़
जिस्म तो मिट्टी में मिलता है यहीं मरने के बाद
गणेश बिहारी तर्ज़
अहल-ए-दिल के वास्ते पैग़ाम हो कर रह गई
गणेश बिहारी तर्ज़
तेज़ आँधी रात अँधयारी अकेला राह-रौ
फ़ुज़ैल जाफ़री
सदाक़तों के दहकते शोलों पे मुद्दतों तक चला किए हम
फ़ुज़ैल जाफ़री
नौमीद करे दिल को न मंज़िल का पता दे
फ़ुज़ैल जाफ़री
हर सम्त लहू-रंग घटा छाई सी क्यूँ है
फ़ुज़ैल जाफ़री
है इबारत जो ग़म-ए-दिल से वो वहशत भी न थी
फ़ुज़ैल जाफ़री
दिलों के आइने धुँदले पड़े हैं
फ़ुज़ैल जाफ़री
चेहरे मकान राह के पत्थर बदल गए
फ़ुज़ैल जाफ़री
आतिश-फ़िशाँ ज़बाँ ही नहीं थी बदन भी था
फ़ुज़ैल जाफ़री
आख़िर चराग़-ए-दर्द-ए-मोहब्बत बुझा दिया
फ़ुज़ैल जाफ़री
उधार
फ़ुर्क़त काकोरवी
फैमली-प्लैनिंग
फ़ुर्क़त काकोरवी
तुझे किस तरह छुड़ाऊँ ख़लिश-ए-ग़म-ए-निहाँ से
फ़िज़ा जालंधरी