Hope Poetry (page 99)
क़यामत है जो ऐसे पर दिल-ए-उम्मीद-वार आए
बेख़ुद देहलवी
न सही आप हमारे जो मुक़द्दर में नहीं
बेख़ुद देहलवी
न अरमाँ बन के आते हैं न हसरत बन के आते हैं
बेख़ुद देहलवी
माशूक़ हमें बात का पूरा नहीं मिलता
बेख़ुद देहलवी
लड़ाएँ आँख वो तिरछी नज़र का वार रहने दें
बेख़ुद देहलवी
ख़ुदा रक्खे तुझे मेरी बुराई देखने वाले
बेख़ुद देहलवी
हुआ जो वक़्फ़-ए-ग़म वो दिल किसी का हो नहीं सकता
बेख़ुद देहलवी
हिजाब दूर तुम्हारा शबाब कर देगा
बेख़ुद देहलवी
हर एक बात तिरी बे-सबात कितनी है
बेख़ुद देहलवी
दोनों ही की जानिब से हो गर अहद-ए-वफ़ा हो
बेख़ुद देहलवी
दिल में फिर वस्ल के अरमान चले आते हैं
बेख़ुद देहलवी
दिल है मुश्ताक़ जुदा आँख तलबगार जुदा
बेख़ुद देहलवी
दे मोहब्बत तो मोहब्बत में असर पैदा कर
बेख़ुद देहलवी
बेवफ़ा कहने से क्या वो बेवफ़ा हो जाएगा
बेख़ुद देहलवी
बनी थी दिल पे कुछ ऐसी की इज़्तिराब न था
बेख़ुद देहलवी
ऐसा बना दिया तुझे क़ुदरत ख़ुदा की है
बेख़ुद देहलवी
अब किसी बात का तालिब दिल-ए-नाशाद नहीं
बेख़ुद देहलवी
अब इस से क्या तुम्हें था या उमीद-वार न था
बेख़ुद देहलवी
आशिक़ हैं मगर इश्क़ नुमायाँ नहीं रखते
बेख़ुद देहलवी
आप हैं बे-गुनाह क्या कहना
बेख़ुद देहलवी
उन की हसरत भी नहीं मैं भी नहीं दिल भी नहीं
बेखुद बदायुनी
आँसू मिरी आँखों में हैं नाले मिरे लब पर
बेखुद बदायुनी
साथ साथ अहल-ए-तमन्ना का वो मुज़्तर जाना
बेखुद बदायुनी
रक़ीबों का मुझ से गिला हो रहा है
बेखुद बदायुनी
पयाम ले के जो पैग़ाम-बर रवाना हुआ
बेखुद बदायुनी
नाले में कभी असर न आया
बेखुद बदायुनी
क्यूँ मैं अब क़ाबिल-ए-जफ़ा न रहा
बेखुद बदायुनी
इस बज़्म में न होश रहेगा ज़रा मुझे
बेखुद बदायुनी
हासिल उस मह-लक़ा की दीद नहीं
बेखुद बदायुनी
तमन्ना बन गई है माया-ए-इल्ज़ाम क्या होगा
बेकल उत्साही