Love Poetry (page 112)

है इबारत जो ग़म-ए-दिल से वो वहशत भी न थी

फ़ुज़ैल जाफ़री

गुज़र रही है मगर ख़ासे इज़्तिराब के साथ

फ़ुज़ैल जाफ़री

घर से बे-ज़ार हूँ कॉलेज में तबीअ'त न लगे

फ़ुज़ैल जाफ़री

दीवाने इतने जम्अ' हुए शहर बन गया

फ़ुज़ैल जाफ़री

दिलों के आइने धुँदले पड़े हैं

फ़ुज़ैल जाफ़री

चुप रहे देख के उन आँखों के तेवर आशिक़

फ़ुज़ैल जाफ़री

छू भी तो नहीं सकते हम मौज-ए-सबा बन कर

फ़ुज़ैल जाफ़री

चेहरे मकान राह के पत्थर बदल गए

फ़ुज़ैल जाफ़री

चमकते चाँद से चेहरों के मंज़र से निकल आए

फ़ुज़ैल जाफ़री

भूले-बिसरे हुए ग़म फिर उभर आते हैं कई

फ़ुज़ैल जाफ़री

आतिश-फ़िशाँ ज़बाँ ही नहीं थी बदन भी था

फ़ुज़ैल जाफ़री

आठों पहर लहू में नहाया करे कोई

फ़ुज़ैल जाफ़री

आख़िर चराग़-ए-दर्द-ए-मोहब्बत बुझा दिया

फ़ुज़ैल जाफ़री

''बंगाल की रक़्क़ासा''

फ़ुर्क़त काकोरवी

जी तन में नहीं न जान बाक़ी

फ्रांस गॉड्लिब क्वीन फ़्रेस्को

ये जो दुश्मन ग़म-ए-निहानी है

फ्रांस गॉड्लिब क्वीन फ़्रेस्को

मेहनत-ओ-दर्द-ओ-रंज-ओ-ग़म और अलम ये रात दिन

फ्रांस गॉड्लिब क्वीन फ़्रेस्को

तमाम जिस्म की परतें जुदा जुदा करके

फ़िज़ा कौसरी

ज़ौक़-ए-नज़र को जल्वा-ए-बेताब ले गया

फ़ितरत अंसारी

ये नहीं कसरत-ए-आलाम से जल जाते हैं

फ़ितरत अंसारी

उन का मंशा है न फैले ख़स-ओ-ख़ाशाक में आग

फ़ितरत अंसारी

तसव्वुर में जमाल-ए-रू-ए-ताबाँ ले के चलता हूँ

फ़ितरत अंसारी

निगाह-ए-हुस्न की तासीर बन गया शायद

फ़ितरत अंसारी

नए जहाँ में पुरानी शराब ले आए

फ़ितरत अंसारी

करम के नाम पे उन का इ'ताब चाहते हैं

फ़ितरत अंसारी

हुस्न-ए-फ़ितरत के अमीं क़ातिल-ए-किरदार न बन

फ़ितरत अंसारी

दामन-ए-हुस्न में हर अश्क-ए-तमन्ना रख दो

फ़ितरत अंसारी

बा'द मुद्दत के ख़याल-ए-मय-ओ-मीना आया

फ़ितरत अंसारी

वह ज़ुल्म-ओ-सितम ढाए और मुझ से वफ़ा माँगे

फ़िरदौस गयावी

उमीद की कोई चादर तो सामने आए

फ़िरदौस गयावी