Love Poetry (page 114)
कम से कम मौत से ऐसी मुझे उम्मीद नहीं
फ़िराक़ गोरखपुरी
इश्क़ फिर इश्क़ है जिस रूप में जिस भेस में हो
फ़िराक़ गोरखपुरी
इश्क़ अभी से तन्हा तन्हा
फ़िराक़ गोरखपुरी
इश्क़ अब भी है वो महरम-ए-बे-गाना-नुमा
फ़िराक़ गोरखपुरी
इस दौर में ज़िंदगी बशर की
फ़िराक़ गोरखपुरी
हम से क्या हो सका मोहब्बत में
फ़िराक़ गोरखपुरी
ग़रज़ कि काट दिए ज़िंदगी के दिन ऐ दोस्त
फ़िराक़ गोरखपुरी
बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं
फ़िराक़ गोरखपुरी
बहुत हसीन है दोशीज़गी-ए-हुस्न मगर
फ़िराक़ गोरखपुरी
बहुत दिनों में मोहब्बत को ये हुआ मा'लूम
फ़िराक़ गोरखपुरी
ऐ सोज़-ए-इश्क़ तू ने मुझे क्या बना दिया
फ़िराक़ गोरखपुरी
शाम-ए-अयादत
फ़िराक़ गोरखपुरी
परछाइयाँ
फ़िराक़ गोरखपुरी
जुगनू
फ़िराक़ गोरखपुरी
जुदाई
फ़िराक़ गोरखपुरी
हिण्डोला
फ़िराक़ गोरखपुरी
आधी रात
फ़िराक़ गोरखपुरी
ज़िंदगी दर्द की कहानी है
फ़िराक़ गोरखपुरी
ज़ेर-ओ-बम से साज़-ए-ख़िलक़त के जहाँ बनता गया
फ़िराक़ गोरखपुरी
ये नर्म नर्म हवा झिलमिला रहे हैं चराग़
फ़िराक़ गोरखपुरी
ये मौत-ओ-अदम कौन-ओ-मकाँ और ही कुछ है
फ़िराक़ गोरखपुरी
वो चुप-चाप आँसू बहाने की रातें
फ़िराक़ गोरखपुरी
वक़्त-ए-ग़ुरूब आज करामात हो गई
फ़िराक़ गोरखपुरी
तूर था का'बा था दिल था जल्वा-ज़ार-ए-यार था
फ़िराक़ गोरखपुरी
तुम्हें क्यूँकर बताएँ ज़िंदगी को क्या समझते हैं
फ़िराक़ गोरखपुरी
तेज़ एहसास-ए-ख़ुदी दरकार है
फ़िराक़ गोरखपुरी
सुना तो है कि कभी बे-नियाज़-ए-ग़म थी हयात
फ़िराक़ गोरखपुरी
सितारों से उलझता जा रहा हूँ
फ़िराक़ गोरखपुरी
शाम-ए-ग़म कुछ उस निगाह-ए-नाज़ की बातें करो
फ़िराक़ गोरखपुरी
सर में सौदा भी नहीं दिल में तमन्ना भी नहीं
फ़िराक़ गोरखपुरी