Love Poetry (page 111)
साँसों की जल-तरंग पर नग़्मा-ए-इश्क़ गाए जा
गणेश बिहारी तर्ज़
सामने आँखों के घर का घर बने और टूट जाए
गणेश बिहारी तर्ज़
रह-ए-इश्क़ में ग़म-ए-ज़िंदगी की भी ज़िंदगी सफ़री रही
गणेश बिहारी तर्ज़
माहौल साज़गार करो मैं नशे में हूँ
गणेश बिहारी तर्ज़
कितने जुमले हैं कि जो रू-पोश हैं यारों के बीच
गणेश बिहारी तर्ज़
जिस्म तो मिट्टी में मिलता है यहीं मरने के बाद
गणेश बिहारी तर्ज़
दोस्ती अपनी जगह और दुश्मनी अपनी जगह
गणेश बिहारी तर्ज़
दोस्ती अपनी जगह और दुश्मनी अपनी जगह
गणेश बिहारी तर्ज़
अहल-ए-दिल के वास्ते पैग़ाम हो कर रह गई
गणेश बिहारी तर्ज़
सर किया ज़ुल्फ़ की शब को तो सहर तक पहुँचे
ग़फ़्फ़ार बाबर
ज़िद में दुनिया की बहर-हाल मिला करते थे
फ़ुज़ैल जाफ़री
ये सच है हम को भी खोने पड़े कुछ ख़्वाब कुछ रिश्ते
फ़ुज़ैल जाफ़री
कोई मंज़िल आख़िरी मंज़िल नहीं होती 'फ़ुज़ैल'
फ़ुज़ैल जाफ़री
किस दर्द से रौशन है सियह-ख़ाना-ए-हस्ती
फ़ुज़ैल जाफ़री
चमकते चाँद से चेहरों के मंज़र से निकल आए
फ़ुज़ैल जाफ़री
भूले-बिसरे हुए ग़म फिर उभर आते हैं कई
फ़ुज़ैल जाफ़री
वो मौज-ए-ख़ुनुक शहर-ए-शरर तक नहीं आई
फ़ुज़ैल जाफ़री
तेज़ आँधी रात अँधयारी अकेला राह-रौ
फ़ुज़ैल जाफ़री
साहब दिलों से राह में आँखें मिला के देख
फ़ुज़ैल जाफ़री
सदाक़तों के दहकते शोलों पे मुद्दतों तक चला किए हम
फ़ुज़ैल जाफ़री
रिश्ता जिगर का ख़ून-ए-जिगर से नहीं रहा
फ़ुज़ैल जाफ़री
क़दम क़दम पे हैं बिखरी हक़ीक़तें क्या क्या
फ़ुज़ैल जाफ़री
निभेगी किस तरह दिल सोचता है
फ़ुज़ैल जाफ़री
नौमीद करे दिल को न मंज़िल का पता दे
फ़ुज़ैल जाफ़री
मौज-ए-ख़ूँ सर से गुज़र जाती है हर रात मिरे
फ़ुज़ैल जाफ़री
मैं उजड़ा शहर था तपता था दश्त के मानिंद
फ़ुज़ैल जाफ़री
ख़ुद लफ़्ज़ पस-ए-लफ़्ज़ कभी देख सके भी
फ़ुज़ैल जाफ़री
कैसा मकान साया-ए-दीवार भी नहीं
फ़ुज़ैल जाफ़री
कैसा मकान साया-ए-दीवार भी नहीं
फ़ुज़ैल जाफ़री
हर सम्त लहू-रंग घटा छाई सी क्यूँ है
फ़ुज़ैल जाफ़री