Love Poetry (page 110)
दूसरा कप
गीताञ्जलि राय
इंतिज़ार-ए-दीद में यूँ आँख पथराई कि बस
ग़व्वास क़ुरैशी
दिल अगर माइल-ए-इ'ताब न हो
ग़व्वास क़ुरैशी
अगर हो चश्म-ए-हक़ीक़त तो देख क्या हूँ मैं
ग़व्वास क़ुरैशी
ज़िंदगी से उम्र-भर तक चलने का वादा किया
गौतम राजऋषि
वो टुकड़ा रात का बिखरा हुआ सा
गौतम राजऋषि
इस बात को वैसे तो छुपाया न गया है
गौतम राजऋषि
हवा जब किसी की कहानी कहे है
गौतम राजऋषि
ये सहरा-ए-तलब या बेशा-ए-आशुफ़्ता-हाली है
गौहर होशियारपुरी
यहाँ कौन इस के सिवा रह गया
गौहर होशियारपुरी
शाइरी बात नहीं गर्म-ए-सुख़न होने की
गौहर होशियारपुरी
सर पर कोई आसमान रख दे
गौहर होशियारपुरी
समन-बरों से चमन दौलत-ए-नुमू माँगे
गौहर होशियारपुरी
मता-ए-इश्क़ ज़रा और सर्फ़-ए-नाज़ तो हो
गौहर होशियारपुरी
मरहला तय कोई बे-मिन्नत-ए-जादा भी तो हो
गौहर होशियारपुरी
मैं ख़ुद ही ख़ूगर-ए-ख़लिश-ए-जुस्तुजू न था
गौहर होशियारपुरी
जाती रुत से प्यार करोगे
गौहर होशियारपुरी
है जो भी जज़ा सज़ा अता हो
गौहर होशियारपुरी
इक साया-ए-शाम याद आया
गौहर होशियारपुरी
दुखी दिलों में, दुखी साथियों में रहते थे
गौहर होशियारपुरी
दिल तमाम आईने तीरा कौन रौशन कौन
गौहर होशियारपुरी
दिल सिलसिला-ए-शौक़ की तश्हीर भी चाहे
गौहर होशियारपुरी
दिल सिलसिला-ए-शौक़ की तश्हीर भी चाहे
गौहर होशियारपुरी
बंदों का मिज़ाज हम ने देखा
गौहर होशियारपुरी
अपना दुखड़ा कहते हैं
गौहर होशियारपुरी
आइए ऐ जान-ए-आलम आइए
गौहर बेगम गौहर
दिल-ए-ग़म-ज़दा पे गुज़र गया है वो हादसा कि मिरे लिए
गणेश बिहारी तर्ज़
'दाग़' के शेर जवानी में भले लगते हैं
गणेश बिहारी तर्ज़
अहल-ए-दिल के वास्ते पैग़ाम हो कर रह गई
गणेश बिहारी तर्ज़
अब मैं हुदूद-ए-होश-ओ-ख़िरद से गुज़र गया
गणेश बिहारी तर्ज़