Love Poetry (page 122)

मैं टूट कर उसे चाहूँ ये इख़्तियार भी हो

फ़ातिमा हसन

क्या कहूँ उस से कि जो बात समझता ही नहीं

फ़ातिमा हसन

ख़्वाब गिरवी रख दिए आँखों का सौदा कर दिया

फ़ातिमा हसन

ख़ुशबू है और धीमा सा दुख फैला है

फ़ातिमा हसन

कौन ख़्वाहिश करे कि और जिए

फ़ातिमा हसन

कहो तो नाम मैं दे दूँ इसे मोहब्बत का

फ़ातिमा हसन

जिन ख़्वाहिशों को देखती रहती थी ख़्वाब में

फ़ातिमा हसन

जिन ख़्वाहिशों को देखती रहती थी ख़्वाब में

फ़ातिमा हसन

बिखर रहे थे हर इक सम्त काएनात के रंग

फ़ातिमा हसन

आँखों में न ज़ुल्फ़ों में न रुख़्सार में देखें

फ़ातिमा हसन

उम्र भर मिलने नहीं देती हैं अब तो रंजिशें

फ़सीह अकमल

सितारों की तरह अल्फ़ाज़ की ज़ौ बढ़ती जाती है

फ़सीह अकमल

किताबों से न दानिश की फ़रावानी से आया है

फ़सीह अकमल

उस की दीवार पे मनक़ूश है वो हर्फ़-ए-वफ़ा

फ़सीह अकमल

प्यार जादू है किसी दिल में उतर जाएगा

फ़सीह अकमल

मुज़्तरिब दिल की कहानी और है

फ़सीह अकमल

मुनव्वर जिस्म-ओ-जाँ होने लगे हैं

फ़सीह अकमल

मुद्दत से वो ख़ुशबू-ए-हिना ही नहीं आई

फ़सीह अकमल

कुछ नया करने की ख़्वाहिश में पुराने हो गए

फ़सीह अकमल

किताबों से न दानिश की फ़रावानी से आया है

फ़सीह अकमल

जड़ों से सूखता तन्हा शजर है

फ़सीह अकमल

ग़ुबार-ए-तंग-ज़ेहनी सूरत-ए-ख़ंजर निकलता है

फ़सीह अकमल

चश्म-ए-हैरत को तअल्लुक़ की फ़ज़ा तक ले गया

फ़सीह अकमल

मैं जिस में रह न सका जी-हुज़ूरियों के सबब

फ़रियाद आज़र

अदा हुआ न क़र्ज़ और वजूद ख़त्म हो गया

फ़रियाद आज़र

सुराग़ भी न मिले अजनबी सदा के मुझे

फ़रियाद आज़र

सुब्ह होती है तो दफ़्तर में बदल जाता है

फ़रियाद आज़र

सबब थी फ़ितरत-ए-इंसाँ ख़राब मौसम का

फ़रियाद आज़र

इसी फ़ुतूर में कर्ब-ओ-बला से लिपटे हुए

फ़रियाद आज़र

इस तमाशे का सबब वर्ना कहाँ बाक़ी है

फ़रियाद आज़र