Love Poetry (page 120)

चंद साँसें हैं मिरा रख़्त-ए-सफ़र ही कितना

फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी

बिसात-ए-दानिश-ओ-हर्फ़-ओ-हुनर कहाँ खोलें

फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी

और क्या मुझ से कोई साहिब-नज़र ले जाएगा

फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी

अच्छा हुआ मैं वक़्त के मेहवर से कट गया

फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी

आँखों के ख़्वाब दिल की जवानी भी ले गया

फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी

आह को बाद-ए-सबा दर्द को ख़ुशबू लिखना

फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी

अपने लोगों के नाम

फ़य्याजुद्दीन साइब

अचार का मर्तबान

फ़य्याज़ तहसीन

तमाशा फिर सर-ए-बाज़ार करना

फ़य्याज़ तहसीन

कभी याद-ए-ख़ुदा कभी इश्क़-ए-बुताँ यूँही सारी उम्र गँवा बैठा

फ़य्याज़ तहसीन

अब आ गए हो तो रफ़्तगाँ को भी याद रखना

फ़य्याज़ तहसीन

आज जाने की ज़िद न करो

फ़य्याज़ हाशमी

न तुम मेरे न दिल मेरा न जान-ए-ना-तवाँ मेरी

फ़य्याज़ हाशमी

शिकवा हम तुझ से भला तेज़ हवा क्या करते

फ़य्याज़ फ़ारुक़ी

राह में उस की चलें और इम्तिहाँ कोई न हो

फ़य्याज़ फ़ारुक़ी

निकला जो चिलमनों से वो चेहरा आफ़्ताबी

फ़य्याज़ फ़ारुक़ी

कहानी हो कोई भी तेरा क़िस्सा हो ही जाती है

फ़य्याज़ फ़ारुक़ी

इश्क़ किया तो अपनी ही नादानी थी

फ़े सीन एजाज़

ये दिल माँगे मोर

फ़े सीन एजाज़

याद

फ़े सीन एजाज़

ख़िज़ाँ में चीनी चाय की दावत

फ़े सीन एजाज़

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फ़े सीन एजाज़

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फ़े सीन एजाज़

उस की हर बात ने जादू सा किया था पहले

फ़े सीन एजाज़

उम्र भर एक सी उलझन तो नहीं बन सकते

फ़े सीन एजाज़

मिरे घर की ईंटें चुरा ले गया वो

फ़े सीन एजाज़

कोई आँख चुपके चुपके मुझे यूँ निहारती है

फ़े सीन एजाज़

ख़र्च जब हो गई जज़्बों की रक़म आप ही आप

फ़े सीन एजाज़

इश्क़ झेला है तो चेहरा ज़र्द होना चाहिए

फ़े सीन एजाज़

दिया जला के कोई चाँद पर रखा होगा

फ़े सीन एजाज़