Love Poetry (page 118)
मुझे उदास कर गए हो ख़ुश रहो
फ़ाज़िल जमीली
मिसाल-ए-शम्अ जला हूँ धुआँ सा बिखरा हूँ
फ़ाज़िल जमीली
मिलने का भी आख़िर कोई इम्कान बनाते
फ़ाज़िल जमीली
मेरे होंटों पे तेरे नाम की लर्ज़िश तो नहीं
फ़ाज़िल जमीली
मैं जिस जगह हूँ वहाँ बूद-ओ-बाश किस की है
फ़ाज़िल जमीली
ख़्वाब में देख रहा हूँ कि हक़ीक़त में उसे
फ़ाज़िल जमीली
ख़ुमार-ए-शब में तिरा नाम लब पे आया क्यूँ
फ़ाज़िल जमीली
ख़िज़ाँ का रंग दरख़्तों पे आ के बैठ गया
फ़ाज़िल जमीली
कहीं से नीले कहीं से काले पड़े हुए हैं
फ़ाज़िल जमीली
हम ने किसी की याद में अक्सर शराब पी
फ़ाज़िल जमीली
गुज़रती है जो दिल पर वो कहानी याद रखता हूँ
फ़ाज़िल जमीली
दास्तानों में मिले थे दास्ताँ रह जाएँगे
फ़ाज़िल जमीली
अब तो अश्कों की रवानी में न रक्खी जाए
फ़ाज़िल जमीली
ये दौर कैसा है या-इलाही कि दोस्त दुश्मन से कम नहीं है
फ़ाज़िल अंसारी
वो बर्क़ का हो कि मौजों के पेच-ओ-ताब का रंग
फ़ाज़िल अंसारी
तोहफ़ा-ए-ग़म भी मिला दर्द की सौग़ात के बा'द
फ़ाज़िल अंसारी
न सनम-कदों की है जुस्तुजू न ख़ुदा के घर की तलाश है
फ़ाज़िल अंसारी
मिरे ज़ख़्म-ए-जिगर को ज़ख़्म-ए-दामन-दार होना था
फ़ाज़िल अंसारी
कोहसारों में नहीं है कि बयाबाँ में नहीं
फ़ाज़िल अंसारी
हुई दिल टूटने पर इस तरह दिल से फ़ुग़ाँ पैदा
फ़ाज़िल अंसारी
गुलज़ार में एक फूल भी ख़ंदाँ तो नहीं है
फ़ाज़िल अंसारी
चमक सितारों की नज़रों पे बार गुज़री है
फ़ाज़िल अंसारी
बता ऐ ज़िंदगी तेरे परस्तारों ने क्या पाया
फ़ाज़िल अंसारी
बशर की ज़ात में शर के सिवा कुछ और नहीं
फ़ाज़िल अंसारी
अश्क आया आँख में जलता हुआ
फ़ाज़िल अंसारी
ऐ कहकशाँ गुज़र के तिरी रहगुज़र से हम
फ़ाज़िल अंसारी
अदीब था न मैं कोई बड़ा सहाफ़ी था
फ़ाज़िल अंसारी
तेरी तस्वीर को तस्कीन-ए-जिगर समझे हैं
फ़ज़ल हुसैन साबिर
ख़ाक में मुझ को मिरी जान मिला रक्खा है
फ़ज़ल हुसैन साबिर
इधर भी देख ज़रा बे-क़रार हम भी हैं
फ़ज़ल हुसैन साबिर