Love Poetry (page 121)

बग़ैर नक़्शे के सारे मकान लगते हैं

फ़े सीन एजाज़

अच्छी-ख़ासी रुस्वाई का सबब होती है

फ़े सीन एजाज़

आँख और नींद के रिश्ते मुझे वापस कर दे

फ़े सीन एजाज़

आइने रूप चुरा लेंगे उधर मत देखो

फ़े सीन एजाज़

दिल ओ नज़र की बक़ा है फ़क़त मोहब्बत में

फ़व्वाद अहमद

बे-कैफ़ कट रही थी मुसलसल ये ज़िंदगी

फ़व्वाद अहमद

उस की गली में ज़र्फ़ से बढ़ कर मिला मुझे

फ़व्वाद अहमद

उन निगाहों को हम-आवाज़ किया है मैं ने

फ़व्वाद अहमद

तुम्हारे लिए मुस्कुराती सहर है

फ़व्वाद अहमद

हमारे दिल की बजा दी है उस ने ईंट से ईंट

फ़व्वाद अहमद

मैं बोली तेरे लब पर है हँसी मेरी

फ़ौज़िया रबाब

क्यूँ मसाफ़त में न आए याद अपना घर मुझे

फ़ौक़ लुधियानवी

ज़िंदगी सादा वरक़ पर इक हसीं तहरीर है

फ़ातिमा वसीया जायसी

यूँ लगा देख के जैसे कोई अपना आया

फ़ातिमा वसीया जायसी

रौ भटकने लगे जब ख़यालात की

फ़ातिमा वसीया जायसी

इक मुश्त-ए-पर हूँ मुझ को यक़ीनन सुकूँ नहीं

फ़ातिमा वसीया जायसी

दिल में इस का ख़याल क्यूँ आया

फ़ातिमा वसीया जायसी

सुकून-ए-दिल के लिए इश्क़ तो बहाना था

फ़ातिमा हसन

ख़्वाबों पर इख़्तियार न यादों पे ज़ोर है

फ़ातिमा हसन

ज़ख़्मी उँगलियों से एक नज़्म

फ़ातिमा हसन

मौसम की पहली बारिश

फ़ातिमा हसन

मनाज़िर ख़ूब-सूरत हैं

फ़ातिमा हसन

अच्छा लगता है

फ़ातिमा हसन

आख़िरी लफ़्ज़

फ़ातिमा हसन

सुकून-ए-दिल के लिए इश्क़ तो बहाना था

फ़ातिमा हसन

रुका जवाब की ख़ातिर न कुछ सवाल किया

फ़ातिमा हसन

रूह की माँग है वो जिस्म का सामान नहीं

फ़ातिमा हसन

क़ुर्बतों में फ़ासले कुछ और हैं

फ़ातिमा हसन

मिरी ज़मीं पे लगी आप के नगर में लगी

फ़ातिमा हसन

मैं टूट कर उसे चाहूँ ये इख़्तियार भी हो

फ़ातिमा हसन