Love Poetry (page 123)
अदा हुआ न क़र्ज़ और वजूद ख़त्म हो गया
फ़रियाद आज़र
तू समझता है कि मैं कुछ भी नहीं तेरे बग़ैर
फ़रताश सय्यद
रंग-ओ-ख़ुशबू का कहीं कोई करे ज़िक्र तो बात
फ़रताश सय्यद
ये दिल-कथा है अदाकार तेरे बस में नहीं
फ़रताश सय्यद
वो भी गुमराह हो गया होगा
फ़रताश सय्यद
सर पे हर्फ़ आता है दस्तार पे हर्फ़ आता है
फ़रताश सय्यद
नख़्ल-ए-ममनूअा के रुख़ दोबारा गया मैं तो मारा गया
फ़रताश सय्यद
मैं अपने दिल की तरह आइना बना हुआ हूँ
फ़रताश सय्यद
कीसा-ए-गुल में बंद थी ख़ुशबू
फ़रताश सय्यद
इश्क़ हूँ जुरअत-ए-इज़हार भी कर सकता हूँ
फ़रताश सय्यद
हम हैं बस इज़्न-ए-सफ़र होने तक
फ़रताश सय्यद
हाँ कभी रूह को नख़चीर नहीं कर सकता
फ़रताश सय्यद
गुँध के मिट्टी जो कभी चाक पे आ जाती है
फ़रताश सय्यद
गली का पत्थर था मुझ में आया बिगाड़ ऐसा
फ़रताश सय्यद
दर-ए-फ़क़ीर पे जो आए वो दुआ ले जाए
फ़रताश सय्यद
हर शख़्स को फ़रेब-ए-नज़र ने किया शिकार
फ़र्रुख़ ज़ोहरा गिलानी
तन्हा छोड़ के जाने वाले इक दिन पछताओगे
फ़र्रुख़ ज़ोहरा गिलानी
होश ओ ख़िरद गँवा के तिरे इंतिज़ार में
फ़र्रुख़ ज़ोहरा गिलानी
दयार-ए-फ़िक्र-ओ-हुनर को निखारने वाला
फ़र्रुख़ ज़ोहरा गिलानी
बीते लम्हे कशीद करती हूँ
फ़र्रुख़ ज़ोहरा गिलानी
तिरे अद्ल के ऐवानों में
फर्रुख यार
रूह-ए-अस्र-ए-रवाँ
फर्रुख यार
मुझे खोल ताज़ा हवा में रख
फर्रुख यार
मालूम करो
फर्रुख यार
ख़बर मफ़क़ूद है लेकिन
फर्रुख यार
हम तो बस
फर्रुख यार
अयाज़ चुप है
फर्रुख यार
वो ख़ाली हाथ सफ़र-ए-आब पर रवाना हुआ
फ़र्रुख़ जाफ़री
मसअला ये है कि उस के दिल में घर कैसे करें
फ़र्रुख़ जाफ़री
कोई मौसम हो कुछ भी हो सफ़र करना ही पड़ता है
फ़र्रुख़ जाफ़री