Love Poetry (page 149)
अगस्त1955
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
अंजाम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ऐ हबीब-ए-अम्बर-दस्त!
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ऐ दिल-ए-बेताब ठहर
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
आख़िरी ख़त
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
आज की रात
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
आज इक हर्फ़ को फिर ढूँडता फिरता है ख़याल
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
आज बाज़ार में पा-ब-जौलाँ चलो
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
यूँ सजा चाँद कि झलका तिरे अंदाज़ का रंग
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ये मौसम-ए-गुल गरचे तरब-ख़ेज़ बहुत है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ये जफ़ा-ए-ग़म का चारा वो नजात-ए-दिल का आलम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
याद-ए-ग़ज़ाल-चश्माँ ज़िक्र-ए-समन-अज़ाराँ
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
याद का फिर कोई दरवाज़ा खुला आख़िर-ए-शब
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
वो बुतों ने डाले हैं वसवसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गया
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
वो अहद-ए-ग़म की काहिश-हा-ए-बे-हासिल को क्या समझे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
वहीं हैं दिल के क़राइन तमाम कहते हैं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
वफ़ा-ए-वादा नहीं वादा-ए-दिगर भी नहीं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
तुझे पुकारा है बे-इरादा
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
तिरी उमीद तिरा इंतिज़ार जब से है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
तेरी सूरत जो दिल-नशीं की है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
तिरे ग़म को जाँ की तलाश थी तिरे जाँ-निसार चले गए
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
सितम सिखलाएगा रस्म-ए-वफ़ा ऐसे नहीं होता
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
सितम की रस्में बहुत थीं लेकिन न थी तिरी अंजुमन से पहले
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शरह-ए-फ़िराक़ मदह-ए-लब-ए-मुश्कबू करें
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शरह-ए-बेदर्दी-ए-हालात न होने पाई
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शाम-ए-फ़िराक़ अब न पूछ आई और आ के टल गई
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शाख़ पर ख़ून-ए-गुल रवाँ है वही
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शैख़ साहब से रस्म-ओ-राह न की
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शफ़क़ की राख में जल बुझ गया सितारा-ए-शाम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
सहल यूँ राह-ए-ज़िंदगी की है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़