Love Poetry (page 150)
सभी कुछ है तेरा दिया हुआ सभी राहतें सभी कुल्फ़तें
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
सब क़त्ल हो के तेरे मुक़ाबिल से आए हैं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
रंग पैराहन का ख़ुशबू ज़ुल्फ़ लहराने का नाम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
रह-ए-ख़िज़ाँ में तलाश-ए-बहार करते रहे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
राज़-ए-उल्फ़त छुपा के देख लिया
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
क़र्ज़-ए-निगाह-ए-यार अदा कर चुके हैं हम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
क़ंद-ए-दहन कुछ इस से ज़ियादा
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
फिर लौटा है ख़ुर्शीद-ए-जहाँ-ताब सफ़र से
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
फिर हरीफ़-ए-बहार हो बैठे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
फिर आईना-ए-आलम शायद कि निखर जाए
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
न किसी पे ज़ख़्म अयाँ कोई न किसी को फ़िक्र रफ़ू की है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
न गँवाओ नावक-ए-नीम-कश दिल-ए-रेज़ा-रेज़ा गँवा दिया
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
न अब रक़ीब न नासेह न ग़म-गुसार कोई
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कुछ पहले इन आँखों आगे क्या क्या न नज़ारा गुज़रे था
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कुछ दिन से इंतिज़ार-ए-सवाल-ए-दिगर में है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
किए आरज़ू से पैमाँ जो मआल तक न पहुँचे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
किसी गुमाँ पे तवक़्क़ो' ज़ियादा रखते हैं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
किस हर्फ़ पे तू ने गोश-ए-लब ऐ जान-ए-जहाँ ग़म्माज़ किया
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कई बार इस का दामन भर दिया हुस्न-ए-दो-आलम से
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कभी कभी याद में उभरते हैं नक़्श-ए-माज़ी मिटे मिटे से
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कब याद में तेरा साथ नहीं कब हात में तेरा हात नहीं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कब तक दिल की ख़ैर मनाएँ कब तक रह दिखलाओगे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
जमेगी कैसे बिसात-ए-याराँ कि शीशा ओ जाम बुझ गए हैं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
जैसे हम-बज़्म हैं फिर यार-ए-तरह-दार से हम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
इश्क़ मिन्नत-कश-ए-क़रार नहीं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
इज्ज़-ए-अहल-ए-सितम की बात करो
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हुस्न मरहून-ए-जोश-ए-बादा-ए-नाज़
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हम ने सब शेर में सँवारे थे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हम सादा ही ऐसे थे की यूँ ही पज़ीराई
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़