Love Poetry (page 155)
हर आश्ना से उस बिन बेगाना हो रहा हूँ
फ़ाएज़ देहलवी
एक पल जा न कहूँ नैन सूँ ऐ नूर-ए-बसर
फ़ाएज़ देहलवी
धूप सा यू कपूल नारी है
फ़ाएज़ देहलवी
ऐ यार नसीहत को अगर गोश करे तू
फ़ाएज़ देहलवी
ऐ सजन वक़्त-ए-जाँ-गुदाज़ी है
फ़ाएज़ देहलवी
अबरू ने तिरे खींची कमाँ जौर-ओ-जफ़ा पर
फ़ाएज़ देहलवी
बिछड़ने वाले ने वक़्त-ए-रुख़्सत कुछ इस नज़र से पलट के देखा
एज़ाज़ अहमद आज़र
तुम ऐसा करना कि कोई जुगनू कोई सितारा सँभाल रखना
एज़ाज़ अहमद आज़र
ये शहर ये ख़्वाबों का समुंदर न बचेगा
एज़ाज़ अफ़ज़ल
उजाला कैसा उजाले का ख़्वाब ला न सके
एज़ाज़ अफ़ज़ल
सरहद-ए-जल्वा से जो आगे निकल जाएगी
एज़ाज़ अफ़ज़ल
सलीक़ा इतना तो ऐ शौक़-ए-ख़ुश-कलाम आए
एज़ाज़ अफ़ज़ल
नद्दी नद्दी रन पड़ते हैं जब से नाव उतारी है
एज़ाज़ अफ़ज़ल
लहू ने क्या तिरे ख़ंजर को दिलकशी दी है
एज़ाज़ अफ़ज़ल
ख़्वाबों के सनम-ख़ाने जब ढाए गए होंगे
एज़ाज़ अफ़ज़ल
जाम खनके तो सँभाला न गया दिल तुम से
एज़ाज़ अफ़ज़ल
दिलों के बीच बदन की फ़सील उठा दी जाए
एज़ाज़ अफ़ज़ल
दर्स-ए-आराम मेरे ज़ौक़-ए-सफ़र ने न दिया
एज़ाज़ अफ़ज़ल
चलो कुछ तो राह तय हो न चले तो भूल होगी
एज़ाज़ अफ़ज़ल
आँगन आँगन ख़ाना-ख़राबी हँसती है मे'मारों पर
एज़ाज़ अफ़ज़ल
आज दिल है कि सर-ए-शाम बुझा लगता है
एज़ाज़ अफ़ज़ल
किस क़दर मसअला-ए-शाम-ओ-सहर बदला है
एज़ाज़ अफ़ज़ल
जिस्म ही पामाल हो जाए तो सर क्या कीजिए
एज़ाज़ अफ़ज़ल
लाशें
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
किरदार
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
ख़ूब-सूरती
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
हिफ़ाज़त
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
बदलते पहलू
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
ज़ीस्त में ग़म हैं हम-सफ़र फिर भी
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
ख़ुशी की मिली ये सज़ा रफ़्ता रफ़्ता
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना