Love Poetry (page 156)
जग में आता है हर बशर तन्हा
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
दर्द इक्सीर के सिवा क्या है
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
दामन तेरा मुझ से छूटा मिलने के हालात नहीं
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
ऐ ग़म-ए-दिल ये माजरा क्या है
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
याद उन की दिल में आई वो आसूदगी लिए
एजाज़ वारसी
राह-ए-तलब में अहल-ए-दिल जब हद-ए-आम से बढ़े
एजाज़ वारसी
मदावा-ए-जुनूँ सैर-ए-गुलिस्ताँ से नहीं होता
एजाज़ वारसी
किसी के शिकवा-हा-ए-जौर से वाक़िफ़ ज़बाँ क्यूँ हो
एजाज़ वारसी
ख़ून-ए-नाहक़ थी फ़क़त दुनिया-ए-आब-ओ-गिल की बात
एजाज़ वारसी
कार-ए-ख़ैर इतना तो ऐ लग़्ज़िश-ए-पा हो जाता
एजाज़ वारसी
कहाँ सबात-ए-ग़म-ए-दिल कहाँ सराब-ए-सुकूँ
एजाज़ वारसी
जिस को देखो बेवफ़ा है आइनों के शहर में
एजाज़ वारसी
दिल बुझ गया तो गर्मी-ए-बाज़ार भी नहीं
एजाज़ वारसी
ज़र्रों का मेहर-ओ-माह से याराना चाहिए
एजाज़ सिद्दीक़ी
नूर की किरन उस से ख़ुद निकलती रहती है
एजाज़ सिद्दीक़ी
दुनिया सबब-ए-शोरिश-ए-ग़म पूछ रही है
एजाज़ सिद्दीक़ी
फ़ितरत के तक़ाज़े कभी बदले नहीं जाते
एजाज़ रहमानी
ज़ालिम से मुस्तफ़ा का अमल चाहते हैं लोग
एजाज़ रहमानी
उसे ये हक़ है कि वो मुझ से इख़्तिलाफ़ करे
एजाज़ रहमानी
रंग मौसम के साथ लाए हैं
एजाज़ रहमानी
नक़्श-बर-आब हो गया हूँ मैं
एजाज़ रहमानी
मिट गया ग़म तिरे तकल्लुम से
एजाज़ रहमानी
ख़ुश्क दरिया पड़ा है ख़्वाहिश का
एजाज़ रहमानी
हँसी लबों पे सजाए उदास रहता है
एजाज़ रहमानी
अब कर्ब के तूफ़ाँ से गुज़रना ही पड़ेगा
एजाज़ रहमानी
उस ने देखा था अजब एक तमाशा मुझ में
एजाज़ उबैद
था वो जंगल कि नगर याद नहीं
एजाज़ उबैद
तेरे दामन की थी या मस्त हुआ किस की थी
एजाज़ उबैद
नए सफ़र में जो पिछले सफ़र के साथी थे
एजाज़ उबैद
मैं ने क्या काम ला-जवाब किया
एजाज़ उबैद